नये नेटवर्क का आगमन

 

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सड़क नेटवर्क

संयोजकता विकास की अनिवार्य शर्त है। यह किसी भी राज्य के विकास के लिए संश्लेषित बुनियादी ताकत है। राज्य से गुजरते राष्ट्रीय ट्रंक मार्ग, उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम कॉरीडोर के साथ मध्यप्रदेश, देश में अपने मध्यवर्ति स्थान पर होने में गर्व महसूस करता है। लेकिन इसे विडंबना ही कहना होगा कि अपने केंद्रीय स्थान के बावजूद मध्यप्रदेश, जिसे देश के राज्यों से सबसे अच्छी तरह से जुड़े हुए राज्यों में से एक होना चाहिए, उसे राष्ट्रीय राजमार्ग और भविष्य की अन्य परियोजनाओं को शुरू करने के मामले में नजरअंदाज कर दिया गया। आंकड़े बताते है कि कुल 200 राजमार्गों में से केवल 18 मध्यप्रदेश से गुजरते है। प्रस्तावित स्वर्ण चतुर्भुज (GQ) के 13252 किलोमीटर क्षेत्र के उत्तर-दक्षिण (NS), और पूर्व-पश्चिम (EW) कॉरीडोर में से केवल 621 किमी (4.68%) राज्य से गुजरेगा।

इस स्थिति का सामना करने पर मध्यप्रदेश सरकार ने गुणवत्तापूर्ण सड़क संयोजकता प्रदान करने के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए कई सामरिक उपाय किए है। एक विशेष उद्देश्य वाहन कंपनी, ‘मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड' (MPRDCL) को 14 जुलाई, 2004 के दिन शामिल किया गया। राज्य ने 02/07/2005 के दिन राजमार्ग अधिनियम प्रख्यापित किया और एमपीआरडीसीएल को ‘राज्य राजमार्ग प्राधिकरण' के रूप में अधिसूचित किया। राज्य बजट नीधी के माध्यम से और एशियाई विकास बैंक की सहायता के साथ बीओटी (निर्माण-परिचालन-अंतरण) सूत्र पर आधारित परियोजनाओं का विकास करने का काम एमपीआरडीसी को सौंपा गया है। सड़कों के विकास में निजी क्षेत्र की भागीदारी को अधिकतम करने पर यह मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित कर रहा है। सड़कों के निर्माण, उन्नयन और रखरखाव, विशाल चुनौतीयां हैं। इन चुनौतीयों का सामना करने के लिए राज्य ने निजी भागीदारी की एक अभिनव रणनीति को अपनाया है। निर्माण-परिचालन-अंतरण के आधार पर अधिक से अधिक सड़कों को विकसित किया जा रहा है।

 

जिन सडकों के विकास के लिए भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा टोल आधार पर रियायत नहीं मिलती, उन्हे इस काम के लिए "व्यवहार्यता अंतर अनुदान" प्रदान किया जा रहा है। इसके अलावा एडीबी ऋण के साथ राज्य में 4384.48 किमी लंबे राजमार्ग का विकास किया जा रहा है। एमपीआरडीसी ने राज्य के बजट के माध्यम से 1587.80 किमी लंबे राज्य राजमार्ग को नियमित अनुबंध के आधार पर विकसित करने का काम शुरू किया है। एमपीआरडीसी ने 2168.20 किमी लंबाई वाले MDR का विकास बीओटी (टोल/वार्षिकी/वार्षिकी+टोल) के आधार पर और 1459.77 किमी लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्ग का विकास भी बीओटी के आधार पर शुरू किया है, साथ ही एमपीआरडीसी के समक्ष OMT (प्रचालन, बनाए रखना और स्थानांतरण) के आधार पर कई सड़कों के रखरखाव के काम का प्रस्ताव है।

निजी निवेश और बड़े निर्माण तथा प्रचालन रखरखाव अनुबंध (ओ एंड एम) के माध्यम से परियोजनाओं के कार्यान्वयन के प्रबंधन के लिए एक संस्था के रूप में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की बदलती भूमिका के कारण विभाग की विशेषज्ञता और क्षमता में सुधार हो रहा है।

राज्य राजमार्ग के विकास और रखरखाव की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने राज्य राजमार्ग विकास निधि स्थापित किया है।

ग्रामीण संयोजकता को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता के कारण ग्रामीण सड़कों का चरणबद्ध विकास, तात्कालिकता से शुरू किया गया है। इस प्रयोजन के लिए, मंडी टैक्स के प्रक्रिया शुल्क के हिस्से के साथ एक ‘किसान सड़क निधि' का गठन किया गया है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत उपलब्ध संसाधन भी ग्रामीण संपर्क बढाने में योगदान दे रहे हैं।

सड़कों की रूपरेखा

  • सड़क की लंबाई;                 किलोमीटर s
  • राष्ट्रीय राजमार्ग               4709
  • राज्य राजमार्ग                   10859
  • प्रमुख जिला सड़के            19574
  • गांव की सड़के                      24209
  • एमपीआरडीसी द्वारा 1459.77 किमी. लंबाई वाले 4 राष्ट्रीय राजमार्गों को 2/4 लेन बनाया जा रहा है।
  • राज्य राजमार्ग के 12 सामरिक क्षेत्र वाली 2443.45 किमी लंबी सड़क को बीओटी के माध्यम से और 3748 किमी लंबी सड़क को पीएमजीएसवाई के माध्यम से उन्नत किया जा रहा है।
  • बीओटी के तहत 1579.65 किमी. लंबाई वाले राज्य राजमार्ग प्रगतिपथ पर हैं। इसके अलावा 863.80 किमी लंबाई वाले राजमार्ग का विकास बीओटी के तहत प्रस्तावित हैं।
  • एडीबी ऋण के तहत 3304.11 किमी. लंबाई वाले राज्य राजमार्ग निर्माण किये गए है और 1080.37 किमी निर्माण के तहत हैं।

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नए प्रतिमान की दिशा में पहल

कुछ साल पहले की बात है, जब मध्यप्रदेश को सड़कों के मामले में गर्व महसूस करनेवाली कोई बात नही थी। सड़कों के विकास के मामले में राज्य निस्संदेह रूप से पीछे था। सड़क के इस दृश्य के कई कारण थे।

राज्य में सड़क विकास के लिए मांग के अनुरूप सरकारी संसाधन नहीं मिल पाए। लेकिन इसमें बदलाव आ गया है।

यहाँ मध्यप्रदेश सरकार के उन विशेष प्रयासों का विवरण दिया गया है, जिन्होने इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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निजी उद्यमियों को शामिल करना

सड़क निर्माण, उन्नयन और रखरखाव की विशाल चुनौती को पूरा करने के लिए सरकार के सामान्य बजट संसाधन अपर्याप्त हैं। इसलिए राज्य सरकार ने राज्य राजमार्ग के निर्माण, पुनर्वास और रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए अभिनव कदम उठाये। निर्माण-परिचालन-अंतरण के आधार पर बड़ी संख्या में सड़के बनाई जा रही है। लेबड-जावरा-नीमच-नयागाव जैसी महत्वपूर्ण सड़के चार लेन की बना दी गई है और भोपाल और इंदौर, भोपाल और देवास तथा इंदौर और उज्जैन जैसे शहरों को चार लेन की सड़कों के माध्यम से जोड़ा गया है। इसके अलावा राजधानी की बढ़ती जरूरतों को समझते हुए, भोपाल के लिए बीओटी के आधार पर चार लेन का उपमार्ग बनाया जा रहा है। पर्यटन स्थलों को भी अच्छी गुणवत्ता वाली सड़कों के साथ जोड दिया गया है।

नई सड़कों के विकास के साथ, सड़कों के रखरखाव को भी निजी भागीदारी के माध्यम से सुनिश्चित किया जा रहा है। टोल जमा करने की अवधि में सड़कों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी बीओटी ऑपरेटर को सौंप दी गई है। जिम्मेदारियां निभाते हुए नई और प्रस्तावित सड़कों के उन्नयन के साथ साथ लंबे समय तक उनके नियमित रखरखाव का ध्यान भी रखा गया है।

इस नये करार प्रतिमान द्वारा क्षेत्र में बड़े संगठित ऑपरेटरों की भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है, जिसके कारण लोक निर्माण विभाग की अनुबंध प्रबंधन क्षमता में सुधार होगा और ठेकेदारों को अधिक जवाबदेही बनना होगा। मौजूदा सड़क नेटवर्क के सार्वजनिक संसाधन, पुनर्वास और रखरखाव की कमी को देखते हुए ताजा क्षमताओं के निर्माण को प्राथमिकता दी गई है।

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विदेशी सहायता की मांग

जिन सड़कों का विकास बीओटी के आधार पर करना व्यवहार्य नहीं, उनका उन्नयन एशियाई विकास बैंक की ऋण सहायता के साथ किया जाता है। अब तक 4384.48 किलोमीटर लंबाई वाले राज्य राजमार्ग के विकास के लिए कुल 770 दशलक्ष अमरिकी डालर के करार किये गये है।

इन उपायों के कारण सड़क क्षेत्र में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता प्राप्त हो पाई है और राजकोष से अतिरिक्त लागत के बिना लंबी अवधि के लिए सड़कों का रखरखाव सुनिश्चित हो गया है। दोषपूर्ण डिजाइन और दोषपूर्ण निष्पादन के लिए जवाबदेही, एक नई संस्कृति भी फैल रही है।

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लोक निर्माण विभाग की पुनर्परिभाषित भूमिका

नए प्रतिमान के तहत, परियोजना के कार्यान्वयन और रखरखाव में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की प्रत्यक्ष भूमिका घट रही है। अब यह विभाग सड़क क्षेत्र के लिए नीतियां तैयार करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। यह विभाग, राज्य में शीर्ष सड़क विकास संस्था के रूप में, परियोजनाओं को राज्य भर में लागू करने की प्राथमिकता को सुनिश्चित करता है। निजीकरण, बड़े निर्माण और ओ एंड एम अनुबंध के माध्यम से परियोजनाओं के कार्यान्वयन के प्रबंधन के लिए एक संस्था के रूप में अपनी भूमिका को नए सिरे से परिभाषित करते हुए, लोक निर्माण विभाग की विशेषज्ञता और क्षमता में सुधार हुआ है।

व्यवहार्य परियोजनाओं की वित्तीय संरचना, नवीनतम करार प्रक्रिया, परियोजनाओं और ठेकेदारों/ऑपरेटरों की निगरानी, पथकरों और अन्य करों का संग्रह, सार्वजनिक संसाधन जुटाना और उनका विवेकपूर्ण खर्च, उचित लेखा और लेखा परीक्षा प्रक्रिया आदि के ज्ञान का आधार और विशेषज्ञता विकसित करने के लिए क्षमता निर्माण अभ्यास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। राज्य के बजट से सड़क क्षेत्र के लिए परिव्यय वृद्धि की जा रही है।

ग्रामीण संपर्क को प्राथमिकता

मध्यप्रदेश सरकार ने मंडी कर की आय से एक किसान सड़क निधि (KRF) बनाया गया है। सड़क विकास के लिए 2% मंडी कर में से 0.85% का प्रावधान किया गया है। वार्षिक आधार पर इस स्रोत से 85 करोड़ रुपये प्राप्त हो रहे हैं। मौजूदा संसाधनों का इस्तेमाल कर अन्य स्रोतों द्वारा वित्त जुटाने की संभावना का भी पता लगाया जा रहा है। पीएमजीएसवाई मौजूदा राल सड़कों के पुनर्वास की अनुमति नहीं देती, इसलिए मौजूदा सड़कों के पुनर्वास और उन्नयन, मुख्य रूप से कृषि उपज की बेहतर आवाजाही के लिए गांवों को जोड़नेवाली प्रमुख जिला सड़कों (MDRs) के उन्नयन के लिए इन निधियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

शिक्षा, स्वास्थ्य, विपणन आदि आवश्यक सुविधाओं तक आसानी से पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राज्य ने सभी गांवों को अच्छी और बारहमासी सड़कों से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया है। अब तक प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 11 हजार 186 करोड़ रुपये की लागत के साथ, 49 हजार 775 किमी लंबी सड़कों का निर्माण पूरा हो चुका है। इन सड़कों के निर्माण के साथ, अब, एक हजार से अधिक आबादी वाले 5769 गांवों में और पांच सौ की आबादी वाले 4100 गांवों में बारहमासी सड़कों की सुविधा उपलब्ध है। केवल वर्ष 2011-12 में 877 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से 2926 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया गया। इस अवधि के दौरान, 2329 किलोमीटर की लंबाई वाली मौजूदा सड़कों को भी उन्नत किया गया।

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मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना

राज्य सरकार ने उन गांवों में ‘मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना' (MGSY) को लागू किया है, जो पीएमजीएसवाई के तहत शामिल नही है। MGSY के तहत 500 से कम आबादीवाले सामान्य गांवों को और 250 से कम आबादीवाले अनुसूचित जनजाति अधिकांश गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ा जा रहा है। अब तक, 1590 किमी लंबी 879 सड़कों का और 2913 पुलों और पुलियों का निर्माण पूरा कर दिया गया है, जिनके साथ आवश्यक सामाजिक और आर्थिक सेवाओं की सुविधा प्रदान की गई है। इस योजना के तहत अब तक 1287 गांवों को मुख्य सड़कों के साथ जोड़ा गया है। वर्तमान में, 13,108 किलोमीटर की सड़कों के निर्माण का कार्य प्रगति पर है।

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Content Courtesy : MP Madhyam.