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बाजरा की कृष कार्यमाला

भूम का चुनाव एवं तैयारी

भूम की चुनाव एवं तैयारयां देाी हल से दो जुताई करने के बाद पाटा चलाना चाहये । बाजरा की फसल लेने के लये खेत को भुरभुरा बना लेना चाहये । बोनी से ३४ सप्ताह पूर्व अच्छा सड़ा हु ा गोबर का खाद १० से १५ गाड़ी प्रत एकड़ डालकर भूम में बखर या हल चलाकर  च्छी तरह मला दें। दीमक वाले क्षेत्रों में बखरनी से पूर्व १० कलो लन्डेन डस्ट प्रत एकड़ डालकर जुताई कर भूम में  च्छी तरह से मला दें ।

 

उन्नत प्रजातयाँ

बाजरा की उन्नत जातयों के बीजों को ही बोना चाहये ।

  • पी.एच.बी.२५ इस जात में प्रत्येक पौधे से २ से ५ कल्ले नकलते हैं । इस जात के पौधों की ऊँचाई २२५ से.मी. तक पाई गई है। पत्ती चौड़ी होती है एवं फसल पकने तक खड़ी रहती है । यह जात ८५ से ९० दनों में पककर तैयार हो जाती है एवं इसके बालयों की लम्बाई औसतन २९ से.मी. होती है । इसकी प्रत एकड़ पैदावार १०१२ क्वंटल एवं चरी की पैदावार २४२५ क्वंटल प्रत एकड़ होती है । यह जात डाउनी मल्डू नरोधक है।
  • डब्ल्यू.सी.सी.७५ यह बाजरा की कम्पोजट कस्म है जो देाी जातयों की पेक्षा धक उपज देती है । इसकी ौसत पैदावार ७.५८ क्वंटल एवं हरी कड़वी ३४३६ क्वंटल प्रत एकड़ नकलती है । यह जात ७८८० दनों में पककर तैयार हो जाती है। कंडवा, रगर एवं डाउनी मल्डू का प्रकोप बहुत कम होता है।
  • बी.के.५६० यह कस्म संकर बाजरा४ के स्थान पर वकसत की गई है। इस जात के पौधों की ऊँचाई २०५ से २१० से.मी. होती है। कल्ले धक नकलते हैं एवं ७५ से ८० दनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी ौसत पैदावार १० से १२ क्वंटल प्रत एकड़ एवं ४५ से ५० क्वंटल कड़वी प्रत एकड़ नकलती है । इसमें डाउनी मल्डू का प्रकोप कम होता है।
  • वजय कम्पोजट : यह एक कम्पोजट जात है । देाी बाजरा की जातयों की पेक्षा यह धक पैदावार देती है । यह ८०८५ दनों में पककर तैयार हो जाती है । इसके पौधों की ऊँचाई धक होती है । इसके बालयां लम्बी तथा मोटी होती हैं । इसकी ौसत पैदावार ८१० क्वंटल प्रत एकड़ होती है।
  • आर.एच. ार१ : यह बाजरा की एक कम्पोजट जात है । इसके पौधों की ऊँचाई १५० से २०० से.मी. तक होती है एवं यह जात ८२९० दनों में पककर तैयार हो जाती है । इस जात में ३ से ८ तक कल्ले नकलते हैं । इसकी ौसत उपज ७.५९.५ क्वंटल प्रत एकड़ होती है । यह जात डाउनी मल्डू नरोधक है। बाजरा की न्य नई प्रस्तावत हाईब्रीड जातयाँ पूजा२३, पूसा४१५, पूसा६०५, पूसा४१५, पूसा कम्पोजट ३८३, एम.बी.एच.१३६, (१९ एच १२३), व्ही.बी.एच.४९ एवं सी.एम.एच.१४२३ हैं।

 

बीज की मात्रा

बाजरा का बीज बहुत छोटा होता है । इसका बीज २ कलो प्रत एकड़ बोया जाता है । यद बीज बोने में कठनाई आये तो इसको बारीक रेत या  च्छी सड़ी हुई गोबर की खाद या बारीक मट्टी के साथ मलाकर बोयें ।

 

बीज बोने का समय एवं तरीका

वर्षा प्रारंभ होते ही जुलाई के दूसरे सप्ताह तक बोनी कर देनी चाहये । बाजरा में कतार से कतार की दूरी ४५ से.मी. (१ह'ह पौधे से पौधों की दूरी १५ से.मी. (६'') रखना चाहये । बीज को १ह से.मी. से २ह से.मी. की गहराई पर बोना चाहये।

 

जैवक खाद

बाजरा की फसल भी ज्वार की फसल की तरह ४ टन नाडेप खाद या २ टन वर्मीकम्पोस्ट एवं ८०० ग्राम पी.एस.बी. कल्चर डालकर  च्छा उत्पादन ले सकते हैं । बाजरा की फसल में  मृत पानी,  मृत संजीवनी एवं मटका खाद का ३४ बार प्रयोग कर  च्छी फसल ले सकते हैं । जैवक खादों के उपयोग के बाद इस बात का ध्यान रखें क फर उसमें रासायनक खाद, रासायनक कीट नयंत्रण एवं रासायनक खरपतवार नााकों का प्रयोग नहीं करें ।

 

रासायनक खाद

बोनी के पूर्व कृषक ३२ कलो नत्रजन, १६ कलो स्फुर एवं पोटाा की कमी वाले क्षेत्रों में ८ कलो पोटाा प्रत एकड़ डालें । ये रासायनक खाद ५ से ६ से.मी. गहराई पर डालें एवं बोनी के २५३० दन बाद ोष १० कलो नत्रजन प्रत एकड़ डालकर फर उसे मट्टी में अच्छी तरह मला दें । यह ध्यान रखें क भूम में पर्याप्त नमी होने पर ही नत्रजन डाले,  न्यथा नहीं डालें ।

 

नंदाई गुड़ाई

बाजरा की फसल जब लगभग १५ दनों की हो जावे एवं जब वर्षा हो रही हो तब बाजरा की फसल में बरलन करना चाहये । जहाँ पौधे  धक घने हो वहाँ से नकालकर जहाँ पौधे कम हो लगा देना चाहये । २०२५ दनों के  न्तर से दो बार नंदाई गुड़ाई करना चाहये । जहाँ बाजरा की फसल छड़कवां वध से बोई गई हो वहाँ पर २०२५ दनों की फसल होने पर देाी हल चलाकर गुड़ाई कार्य करें । चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के जसे  ट्राजन २०० ग्राम प्रत एकड़ की दर से फसल बोने के पूर्व खेत में छड़ककर  च्छी तरह से मला दें ।

 

  • सीताफल के २ कलो बीजों को ४८ घंटे तक पानी में गलायें एवं इन्हें अच्छी तरह मसलकर छानकर २५० लीटर पानी में मलाकर प्रत एकड़ छड़काव करें।
  • १२ कलो नीम की पत्तयों को पानी में ४५ दन गलायें एवं च्छी तरह मसलकर मलायें।इसे छानकर २५० लीटर पानी में मलाकर कीट लगने के पूर्व प्रत एकड़ छड़काव करें।
  • ५०० ग्राम लहसुन एवं ५०० ग्राम हरी मर्च को च्छा पीसकर पहले ५ लीटर पानी में मलाकर छान लें फर इसे २५० लीटर पानी में मलाकर एक एकड़ में छड़काव करें।
  • नीम ाइल ६०० म.ली.८०० म.ली. २५० म.ली. पानी में मलाकर एक एकड़ क्षेत्र में छड़कें ।
  • प्रकाा प्रपंच लगाकर खेत में कीट की तीव्रता मालूम करें एवं उनके नीचे से कीटों को एकत्र कर गड्ढों में गाड़ दें ।

यद जैवक कीट नयंत्रण से कीटों की रोकथाम न हो तब रासायनक कीट नयंत्रण करें । कार्बोरल डस्ट १० ऽ या फालीडाल डस्ट २ ऽ या थायोडान डस्ट ४ऽ या इकालक्स डस्ट १.५ ऽ को ८१० कलो प्रत एकड़ भुरकाव करें। यद डस्ट उपलब्ध न हो तो मेटासस्टाक्स २५ ई.सी. ४०० म.ली. या रोगर ३० ई.सी. ३२० म.ली. से ४०० म.ली. या नुवाक्रान ३ ई.सी. ३२० म.ली. प्रत एकड़ की दर से छड़काव करें ।

 

बीमारयाँ

  • डाउनी मल्डू व कंडवा रोग के उपचार हेतु खेत में रोग ग्रसत पौधों को नकालकर गड्डों में गाड़ दे या उनको जला दें ।
  • अरगर : बीज को २ऽ नमक के घोल में डुबाना चाहये । स्केलेरोायम ग्रस्त बीज पानी में ऊपर तैरकर ा जावेगें । ऐसे बीजों को नकालकर फेंक देना चाहये । ोष रोग रहत बीजों को नकालकर छाया में च्छी तरह सुखा लेना चाहये । इन बीजों को बोने के पहले थायरम एवं ारगेनो मरक्यूरयल कम्पाउन्ड २.५ से ३ ग्राम प्रत कलो बीज में मलाकर उपचारत कर लें एवं बाद में उसी दन बु ाई कर दें ।

 

फसल की कटाई, गहाई एवं भण्डारण

बाजरा फसल की फलयाँ अच्छी तरह पक जाने पर फसल की कटाई करना चाहये । कटाई के पचात फसल को एक स्थान पर एकत्र कर उसकी कलयाँ  लग कर जावे । फर फलयों को दावन कर या थ्रेसर से गहाई कर दाने  लग कर लें । बाजरा फसल के दाने  च्छी तरह सुखा लें । फर बोरों पर ०.०५ऽ मेलाथयान का घोल छड़कें एवं बोरों को  च्छी तरह सुखाकर उनमें बाजरा केे दानों का भण्डारण कर सुरक्षत जगह पर रख दें । बण्डों या कोठयों में भण्डारण करना हो तो उनमें भी ०.०५ऽ मेलाथयान का घोल छड़कें एवं  च्छी तरह सुखाकर फर भण्डारण करें।