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योजना का नाम :- राष्ट्रीय बायोगेस विकास योजना (केन्द्र पोषित)

कार्यक्रम/योजना के प्रभावी रहने की समय सीमा : निरन्तर

कार्यक्रम का उद्देश्य : 1. भोजन बनाने हेतु सस्ता एवं सुलभ ईंधन उपलब्ध कराना।

                                   2. उत्तम पचा हुआ खाद कृषि हेतु उपलब्ध कराना।

                                   3. बॉयोगेस से प्रकाश उपलब्ध कराना।

कार्यक्रम के भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य : वर्ष 2009-10 के भौतिक लक्ष्य (संख्या में) 17000 एवं पूर्ति 15114, वित्तीय (निरंक)एवं वर्ष 2010-11 के भौतिक लक्ष्य (संख्या में) 17250 है।

लाभार्थी की पात्रता : लाभार्थी के पास गोबर के लिए पशुओ का होना आवश्यक है।

पूर्वापेक्षाएॅ : बायोगेस स्लरी से कृषि पैदावार भी बढ़ाई जा सकती है।

कार्यक्षेत्र एवं विस्तार : यह योजना सम्पूर्ण प्रदेश में सभी प्रकार के हितग्राहियों को जिनके पास पशुधन है, लागू है।

 

हितग्राही चयन की प्रक्रिया:

  • हितग्राही का चयन ग्राम सभा द्वारा किया जायेगा।
  • चयनित हितग्राही की सूची 4 प्रतियों में तैयार की जावेगी।
  • चार प्रतियों में से एक प्रति क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी को भेजी जावेगी।
  • दूसरी प्रति निर्माणकर्ता संस्था को दी जावेगी।
  • तीसरी प्रति जिला पंचायत कार्यालय को भेजी जावेगी। तथा शेष प्रति ग्राम पंचायत अपने पास रखेगी।
  • ग्राम सभा द्वारा चयनित हितग्राही की सूची में परिवर्तन का अधिकार किसी भी अन्य पंचायत को नही होगा।
  • सूंची में लक्ष्य से 20 प्रतिशत अधिक हितग्राही चयनित किये जावेगे।

 

 

अनुदान/सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया आवेदक द्वारा निर्धारित प्रारूप में आवेदन करने के उपरान्त ग्राम सभा एवं जनपद पंचायत की कृषि स्थाई समिति से अनुमोदन पश्चात योजना के तकनीकी मापण्डों का पालन करने पर केन्द्र शासन से निर्धारित अनुदान दिया जाता है ।
पात्रता निश्चित करने के लिये मापदण्ड बजट प्रावधान के अंतर्गत लाभार्थी को लिखित आवेदन होना एवं लाभार्थी का नाम, ग्राम सभा एवं जनपद पंचायत की कृषि स्थाई समिति से अनुमोदन होना ।
पात्रता निश्चित करने के लिये मापदण्ड बजट प्रावधान के अंतर्गत लाभार्थी को लिखित आवेदन होना एवं लाभार्थी का नाम, ग्राम सभा एवं जनपद पंचायत की कृषि स्थाई समिति से अनुमोदन होना ।
दिये जाने वाले अनुदान / सहायता का विवरण
  • अनुसूचित जाति#जनजात/लघ/सीमांत/भूमिहीन कृषकों के लिये 1 घन मी. के बॉयोगेस संयंत्र निर्माण पर लागत का 50 प्रतिशत अथवा रु. 4000/- अधिकतम एवं 2 से 4 घन मी. के संयंत्र के लिये निर्माण पर लागत का 50 प्रतिशत अथवा रु. 8000/- अधिकतम देय है।
  • सामान्य श्रेणी के कृषकों के लिये रु. 2700/- प्रति संयंत्र देय है।
  • शौचालय से जुड़े संयंत्रों पर रु. 1000/- प्रति संयंत्र के मान से अनुदान दिया जाता है।
अनुदान सहायता के वितरण की प्रक्रिया पात्रतानुसार अनुदान राशि हितग्राही के खाते में समायोजित करने की कार्यवाही नोडल संस्था एम.पी.एग्रो/ उर्जा विकास निगम द्वारा की जावेगी।
आवेदन करने के लिये कहॉ / किससे सम्पर्क करें विकास खण्ड स्तर पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के कार्यालय में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करें ।
आवेदन शुल्क (जहॉ उचित हो) : नहीं
अन्य शुल्क (जहॉ उचित हो) : नहीं
आवेदन पत्र हेतु क्लिक करेंबाहरी फ़ाइल जो एक नई विंडों में खुलती हैं