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कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय

विभागीय संरचना

  कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय में प्रदेश स्तर पर संचालक कृषि अभियांत्रिकी शीर्षस्थ अधिकारी हैं। मुख्यालय स्तर पर 1 संयुक्त संचालक कृषि अभियांत्रिकी, 1 कृषि यंत्री एवं 2 सहायक कृषि यंत्री के पद स्वीकृत हैं । इसके अलावा 6 संभागों - भोपाल , इन्दौर , ग्वालियर , जबलपुर , सागर एवं सतना में कृषि यंत्री/कार्यपालन यंत्री के कार्यालय एवं भोपाल में कृषि यंत्री (अनुसंधान) का भी कार्यालय है । इसी प्रकार 11 जिलों भोपाल, विदिशा, इटारसी, इन्दौर, खण्डवा, ग्वालियर, शिवपुरी, जबलपुर, सिवनी, सागर, एवं सतना में सहायक कृषि यंत्री के कार्यालय हैं ।

 

पदोन्नतियों, नियुक्तियों, स्थानांतरण एवं विभागीय जांच की स्थिति वर्ष 2011-12

(31 दिसंबर 2011 की स्थिति में)

क्रमांक

वितरण

प्रथम श्रेणी

द्वितीय श्रेणी

तृतीय श्रेणी

चतुर्थ श्रेणी

योग

1

 पदोन्नति

-

-

41

-

41

2

विभागीय जांच

1

-

1

1

3

3

नियुक्ति

0

0

0

18

18

4

स्थानांतरण

0

2

8

8

18

न्यायालयीन प्रकरणों की कुल संख्या - 65 विभाग के दायित्व   

  इस संचालनालय का प्रमुख दायित्व कृषि उत्पादन में वृध्दि हेतु कृषि यंत्रीकरण का विकास है। इस हेतु निम्न गतिविधियॉ  संचालित की जा रही हैं

  • विभिन्न कृषि कार्यो हेतु बैल चलित, हस्त चलित तथा शक्ति चलित उन्नत कृषि यंत्रों का अनुदान पर कृषकों को वितरण।

  •  कम्बाईन हार्वेस्टर, पावर टिलर्स तथा 40 पी.टी.ओ. अश्वशक्ति तक के टे्रक्टर्स का अनुदान पर कृषकों को वितरण।

  • उन्नत कृषि यंत्रों के प्रति जागरूकता लाने हेतु विभिन्न कृषि कार्यो के लिये उपयोगी नवीनतम उन्नत कृषि यंत्रों का कृषकों के खेतों में प्रदर्शन।

  • विभिन्न कृषि कार्यो हेतु विभागीय मशीनों को कृषकों को किराये पर उपलब्ध कराया जाना।

  • नवीन उन्नत कृषि यंत्रों के रख-रखाब एवं समुचित उपयोग हेतु कृषकों को प्रशिक्षण।

  • सामूहिक रूप से यंत्रीकृत कृषि अपनाने से प्राप्त होने वाले लाभों के प्रति कृषकों को जागरूक करना।

  • प्रदेश की कृषि की विशिष्ट समस्याओं जैसे पड़त भूमि, छिटकवां पध्दति, नरवाई जलाना आदि के निदान में कृषि यंत्रों के उपयोग के प्रति कृषकों को जागरूक करना।

  • ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों में छोटे कृषि यंत्रों के निर्माण के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करना।

 

सामान्य जानकारी

    इस संचालनालय के अधीन वर्तमान में 276 व्हील टाईप टै्रक्टर उपलब्ध हैं। टे्रक्टर के साथ चलने वाले यंत्रों में खेत की तैयारी के लिये 220 रिवर्सिबल प्लाऊ, 218 रोटावेटर एवं भूमि समतलीकरण करने हेतु 3 लेजर लैंड लेवलर उपलब्ध हैं। बोनी के लिये 113 जीरो टिलेज सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल एवं 165 रेज्ड बेड प्लांटर उपलब्ध हैं। 26 पावर टिलर, धान रोपाई के लिये 10 राइस ट्रान्सप्लान्टर तथा धान की फसल कटाई एवं गहाई कार्य के लिये 1 कम्बाईन हार्वेस्टर उपलब्ध है। फसलों की कटाई एवं बंडल बंधाई कार्य हेतु 30 रीपर कम बाइन्डर भी उपलब्ध है। मैक्रो मैनेजमेन्ट के अन्तर्गत ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन'' की योजनान्तर्गत कृषकों को अनुदान पर बैल चलित, शक्ति चलित कृषि यंत्र, पावर टिलर, कम्बाईन हार्वेस्टर एवं छोटे टे्रक्टर का तथा पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नॉलाजी एण्ड मैनेजमेन्ट के कार्यक्रम का क्रियान्वयन जिलों के उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास के माध्यम से क्रियान्वित किया जाता है।

भाग-2
बजट प्रावधान

वर्ष 2011-12 में योजनाओं में बजट प्रावधान एवं व्यय निम्नानुसार रहा:-

(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

क्र.

योजना का नाम

बजट प्रावधान

व्यय (रू. लाख में)

1

मशीन ट्रेक्टर स्टेशन का सुदृढ़ीकरण

75.00

6.00

2

कृषि अभियांत्रिकी संचालनालय के अंतर्गत अधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण

5.00

1.94

3

प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिये कृषि यांत्रिकीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढ़ीकरण

100.00

98.59

4

मैक्रो मैनेजमेंट योजना ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन''

1538.00

839.42

5

हस्तचलित/बैलचलित यंत्रों पर टॉपअप अनुदान

386.00

242.90

6

पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मेनेजमेंट योजना

253.64

150.35

7

 राष्ट्रीय कृषि विकास योजना-

 

 

7.1

हलधर योजना

468.00

415.66

7.2

सीड ग्रेडर एवं बीज उपचार यंत्र वितरण

309.50

306.37

7.3

हलधर सेवा केन्द्र

350.00

339.34

7.4

फामर्स ट्रेनिंग

22.50

22.50

8

कृषि शक्ति योजना

135.00

79.93

राज्य योजना तथा केन्द्र प्रवर्तित योजना
राज्य योजनायें

राज्य योजनाओं के अन्तर्गत वर्ष 10-11 एवं वर्ष 11-12 की उपलब्धियाँ निम्नानुसार रही :-
 

क्र.

कार्यक्रम

उपलब्धि 2010-11

उपलब्धि 2011-12
(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

1

व्हील टाईप टे्रक्टर्स से हल्की जुताई , बखरनी , बोनी आदि के कृषि कार्य

54700 घंटे

49775 घंटे

2

कृषि शक्ति योजनांतर्गत पावरटिलर वितरण

240

185

3

हस्तचलित एवं बैलचलित यंत्रों का वितरण

50000

47555

 

भाग-3
हितग्राही मूलक योजनाएं

 

1) केन्द्र पोषित मैक्रो मेनेजमेंट ''कृषि यंत्रीकरण के प्रोत्साहन की योजना'' की उपलब्धियां (31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में )


            अनुदान पर वितरण                                              (इकाई संख्या में)

क्रमांक

कार्यक्रम

लक्ष्य

उपलब्धि 2011-12
(31 दिसम्बर 2011 की स्थिति में)

1

टे्रक्टर

1890

1090

2

पावर टिलर

240

185

3

शक्तिचलित कृषि उपकरण

2579

2275

4

बैलचलित, हस्तचलित उननत कृषि यंत्र

50000

47555

 

(2) केन्द्रीय क्षेत्रीय योजना की उपलब्धियॉ :

                                                                       

क्रमांक 

योजना का नाम

लक्ष्य

उपलब्धि 2011-12

1

प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिये कृषि यांत्रिकीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढीकरण योजना

नवीन यंत्रों का किसानों के खेतों में प्रदर्शन (संख्या)

5700

5016

2

पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मेनेजमेन्ट योजना

(अ) अनुदान पर वितरित कृषि उपकरण (संख्या)

620

435

(ब) पोस्ट हार्वेस्ट उपकरणों के प्रदर्शन (संख्या)

144

122

(स) कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम

1000 कृषक

990 कृषक

3

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

हलधर योजना (हेक्टेयर)

53000

48220

 

भाग-चार
सामान्य प्रशासनिक विषय

जॉच समितियॉ/किये गये अध्ययन- वर्ष 2011-12 में किसी भी समिति का गठन नहीं हुआ और न ही कोई अध्ययन किया गया।

भाग-पांच
संचालनालय के अधीन संचालित की जाने वाली योजनाओं का विवरण

  • केंद्र पोषित योजनाएं

    • ''मैक्रो मैनेजमेन्ट ''कृषि यंत्रीकरण को प्रोत्साहन की योजना''
      यह केन्द्र पोषित योजना है, जिसमें केन्द्र तथा राज्य का हिस्सा 90:10 है । इस योजना के अन्तर्गत ''कृषि यंत्रीकरण के प्रोत्साहन'' का कार्यक्रम इस संचालनालय द्वारा संचालित किया जा रहा है जिसमें कम्बाईन हार्वेस्टर, 40 पी.टी.ओ. हार्सपावर तक के टे्रक्टर, 8 बी.एच.पी. से अधिक के पावर टिलर, शक्तिचलित एवं बैलचलित/हस्तचलित उन्नत कृषि यंत्रों के क्रय पर कृषकों को अनुदान देय है।

    • प्रशिक्षण, परीक्षण तथा प्रदर्शन के जरिए कृषि यंत्रीकरण का प्रोत्साहन तथा सुदृढ़ीकरण :-
      इस योजना के अंतर्गत उन्नत कृषि यंत्रों के कृषकों के खेतों में प्रदर्शन आयोजित किये जाते है। इस हेतु शत्-प्रतिशत राशि भारत सरकार से प्राप्त होती है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कृषकों के खेतों में नवीनतम उन्नत कृषि यंत्रों के प्रदर्शन आयोजित किये जाते है। इन प्रदर्शनों के निम्न परिणाम रहे :-

      • नवीन विकसित शक्ति चलित उन्नत कृषि मशीनरी के प्रदर्शन से कृषकों में इनके उपयोग हेतु जागरूकता बढ़ी है।

      • कृषि के एक फसली क्षेत्र को दो फसली क्षेत्र में परिवर्तित करने में रोटावेटर एवं जीरो टिलेज सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल कॉफी उपयोगी रहे है।

      • आधुनिक कृषि मशीने जैसे - रीपर कम बाइंडर, रेज्ड बेड प्लांटर, रोटावेटर आदि के परिणाम से कृषकगण प्रभावित हुये है।

      • कम्बाईन हार्वेस्टर से कटाई के बाद गेहूं के डंठल खेत में ही कृषकों द्वारा जला दिये जाने से भूसे का नुकसान तो होता ही है, साथ ही साथ खेत की उर्वरा शक्ति भी कम हो जाती है। इस परंपरा को दूर करने व कृषकों को भूसे का लाभ दिलाने हेतु स्ट्रा रीपर के प्रदर्शन किये गये।

      • कतार में खाद एवं बीज को अलग-अलग बोने हेतु विभाग द्वारा 3 कतारी बैलचलित सीड-कम-फर्टिलाईजर ड्रिल के प्रदर्शन किये गये जिससे छोटे किसान कतार में बोनी की पध्दति को अपना सकें।

       

    • पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी एण्ड मैनेजमेंट :-
      यह केन्द्र क्षेत्रीय योजना है। योजना का उद्देश्य कृषकों का पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी उपकरणों के उपयोग के लिये प्रोत्साहित करना है जिससे कृषि उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार करके कृषकों को उपज का अधिक मूल्य दिलाया जा सके। इस कार्यक्रम के माध्यम से कृषकों को विभिन्न प्रकार के पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी उपकरणों के क्रय पर अनुदान दिये जाने का प्रावधान है। योजनान्तर्गत 2.00 लाख तक के पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालॉजी/उपकरण्ाों पर 40 प्रतिशत की दर से अनुदान दिया जाता है। योजनान्तर्गत पोस्ट हार्वेस्ट टेक्नालाजी उपकरणों के प्रदर्शन एवं कृषकों को प्रशिक्षण दिये जाने का भी प्रावधान है।

    • राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अन्तर्गत

      • हलधर योजना
        छोटे एवं कमजोर कृषकों के खेती की उत्पादकता बढ़ाने तथा बर्षा जल संग्रहण करने की क्षमता में वृध्दि करने की दृष्टि से गहरी जुताई की एक विशेष ''हलधार योजना'' वर्ष 2010-11 में प्रारंभ की गई है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के सभी कृषक तथा सामान्य वर्ग के लघु एवं सीमान्त कृषक योजनान्तर्गत लाभ लेने हेतु पात्र हैं। योजना अन्तर्गत गहरी जुताई की लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 1500/- प्रति हेक्टे. का अनुदान कृषक को दिया जाता है। एक कृषक 4 हेक्टेयर तक के खेत की गहरी जुताई योजनान्तर्गत करवा सकता है। वर्ष 2011-12 हेतु 53000 हेक्टेयर भूमि की गहरी जुताई का लक्ष्य लिया गया था, जिसके विरूध्द इस वर्ष 48220 हेक्टेयर खेत की गहरी जुताई का कार्य किया जा चुका है।

      • कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना
        ऐसे कृषक जो अपनी कृषि संबंधी जरूरतों हेतु पृथक से टै्रक्टर एवं कृषि यंत्रों का क्रय नही कर सकते है उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु किराया आधार पर टै्रक्टर एवं कृषि यंत्र उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश में वर्ष 2010-11 में 850 कस्टम हायरिंग केन्द्रों की स्थापना की गई है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत यह उपयोजना मूलत: दलहन एवं तिलहन उत्पादक गांव की उत्पादकता वृध्दि हेतु वर्ष 2010-11 के लिये लागू थी। प्रत्येक कस्टम हायरिंग केन्द्र में टै्रक्टर के साथ आवश्यक कृषि यंत्र उपलब्ध कराये गये हैं जो पूर्व निर्धारित दरों पर कृषकों को उपलब्ध कराये जाते है।

       

  • राज्य योजनाएं -

    • कृषि शक्ति योजना (टाप अप अनुदान) :-
      प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण की गतिविधियों को समग्र रूप से विस्तारित करने के उद्देश्य से कृषि यंत्रीकरण प्रोत्साहन कार्यक्रम ''कृषि शक्ति योजना'' प्ररांभ की गई है। जिसके यंत्रीकृत कृषि के लाभ से कृषकों को अवगत कराने के उद्देश्य से यंत्रदूत ग्रामों का विकास किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि यंत्रों के निर्माण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्कशॉप हेतु मशीनों की लागत का 50 प्रतिशत अधिकतम एक लाख रूपये तक का अनुदान दिया जाता है। प्रदेश में पावर टिलर के उपयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मेक्रो-मेनेजमेन्ट योजना में उपलब्ध अनुदान के अतिरिक्त राज्य शासन की ओर से 25 प्रतिशत अधिकतम रू. 30000 तक का अनुदान भी योजनान्तर्गत दिया जाता है।
      बुवाई, निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई, कीट-आदि नियंत्रण, कटाई, गहाई आदि के लिये प्रयुक्त होने वाली नवीन तकनीकों के कृषि यंत्रों/उपकरणों का प्रदर्शन खेतों में किया जाता है। इसके माध्यम से कृषक खेती की लागत क्रय करके उत्पादन में वृध्दि प्राप्त कर रहे हैं तथा कृषकों का रूझान यंत्रीकृत कृषि की ओर बढ़ा है।

    • टाप अप अनुदान -कृषि यंत्रीकरण योजना अन्तर्गत लघु एवं सीमान्त, अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सभी वर्गो के किसानों को हस्तचलित/बैलचलित उन्नत कृषि यंत्रों पर विशेष 50 प्रतिशत टॉप-अप अनुदान की व्यवस्था राज्य शासन द्वारा दी गई है। हस्तचलित यंत्रों के क्रय पर कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम रूपये 4000 एवं बैलचलित कृषि यंत्रों के क्रय पर कीमत का 50 प्रतिशत अधिकतम रू. 5000 का अनुदान कृषक प्राप्त कर सकते है।

 

भाग-छ:
विभागाध्यक्ष द्वारा निकाले जा रहे प्रकाशन :


उन्नत कृषि यंत्रों को कृषकों में प्रचलित कराने हेतु कृषकों को दी जाने वाली सुविधा संबंधी जानकारी पम्पलेट इत्यादि के माध्यम से प्रकाशित की जाती है।