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उर्वरक गुण नयंत्रण प्रयोगालायें

स्थापना/उद्देय: उर्वरक वभन्न फसलों के उत्पादन में प्रमुख आदान है। उर्वरकों की गुणवत्ता बनाये रखने के लए उर्वरक को  ावयक वस्तु  धनयम १९५५ के  ंतर्गत रखा गया है । उर्वरक (नयंत्रण)  ादेा १९८५ के  ंतर्गत प्रयोगााला ों की स्थापना की गई है ।
कार्यस्थल:  सबसे पुरानी उर्वरक प्रयोगााला जबलपुर में स्थापत की गई बाद में ग्वालयर, इन्दौर एवं भोपाल में भी उर्वरक प्रयोगाालाओं की स्थापना की गई।
अमाला: सहायक रसायन वोषज्ञ  धकारी प्रयोगााला के प्रभारी रहते हेै एसएडी ो स्तर के ४  धकारी जो वलेषक के पदों पर नत्रजन, स्फुर, पोटाा वलेषण का कार्य करते हैं, एक एकाउन्टेन्ट एक सहायक ग्रेड३ एव् ां एक भृत्य, एक प्रयोगााला परचालक के पद भी सवीकृत है एवं उन पदों पर कर्मचारी कार्य कर रहे है ।
बजट: ग्लाय वेयर एवं रसायन खरीदी हेतु प्रत प्रयोगााला अनुमानत २.०० लाख रू  पयों का  ावंटन तथा  मले के वेतन हेतु  नुमानत ७.०० लाख का  ावंटन दया जाता है ।
उर्वरक नमूने : प्रत प्रयोगााला अनुमानत १२०० नमूने वर्ष में जांच ह ेतु प्राप्त होते है । नमूनों में प्रमुखतः यूरया, डीएपी, १२ः३२ः१६ पोटाा, सीएएन १५ः१५ः१५, एसएसपी  ाद उर्वरकों के नमूने जले के उर्वरक नरीक्षकों स े उप संचालक कृष के माध्यम से संबंधत उर्वर क गुण नयंत्रण प्रयोगााला को भेजा जाता है । नमूना लेने समय 'पी' फार्म करना होता है । तीन थैलयों में नमूना लया जाता है । एक प्रयोगााला को एक वक्रेता की दुकान/सोसाईटी में रखी जाती है, एक थैली गार्ड नमूना की उप संचालक कृष कार्यालय में रखी जाती है, ७ दवस के  ंदर उर्वरक नमूना प्रयोगााला में भेजने का बंधन एफ.सी. ो. में दया गय् ाा ह ै । प्रयोगााला परीक्षण कर उर्वरक नमूनों के परणाम प्रपत्र एल.४ में ६० दनों के भीतर संबंधत उप संचालक कृष को भेज दया जाता है ।  मानक परणाम की दाा में उप संचालक कृष स्तर से एफ.सी.  ो. को धारा ों की तहत प्रकरण पंजीबद्घ होकर फैसला होता है ।
ायोगाालावार उर्वरक नमूनों का वतरण : -
संयुक्त संचालक कृष (प्रयोगााला): समस्त ४ प्रयोगाालाओं को संचालनालय स्तरपर समस्त संयुक्त संचालक कृष उर्वरक, नयंत्रण एवं रपोर्ट  ाद रखते है ।
रपोर्ट संकलन: ए.सी.एस. जबलपुर, इन्दौर, ग्वालयर एवं भोपाल -ारा प्रपत्र ''एल'' में उर्वरक वलेषण रपोर्ट संबंधत जलों को भेजी जाती है । संचालनालय स्तर पर संयुक्त संचालक कृष (फर्ट.) -ारा साप्ताहक गोस वारा, कम्पनीवार, उर्वरकवार, जलेवार मानक अथवा  मानकवार बनाया जाकर ाासन को प्रत मंगलवार भेजकर समीक्षा करायी जाती है । इससे  मानक स्तर पर उर्वरक बनाने वाली  थवा प्रदाय करने वाली कम्प् ानयों परनगरानी रखी जाकर कृषकों को उत्तम गुणवत्ता वाला उर्वरक वतरण में प्रयोगााला चेक प्वाइंट का कार्य करती रहती है ।