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रबी फसल गेंहू - गेंहू की कृष कार्यमाला (संक्षप्त)

भूम का चुनाव एवं तैयारी

गेंहू की खेती उचत जल प्रबंध के साथ सभी प्रकार की भूमयों में की जा सकती है। वपुल उत्पादन के लये गहरी एवं मध्यम दोमट भूम सर्वाधक उपयुक्त है।

 

असंचत क्षेत्र

वर्षा पर नर्भर क्षेत्रों में छोटेछोटे कन्टूर बना कर भूम के कटाव  ौर प्रत्येक जल को रोका जाना चाहये। गर्मयों में खेत की गहरी जुताई करें। नमी संरक्षण हेतु प्रत्येक वर्षा के बाद बतर  ाने पर समयसमय पर खेत की जुताई करते रहें तथा वर्षा समाप्त होने पर प्रत्येक जुताई के बाद  वष्य लगायें।

 

संचत क्षेत्र

खरीफ फसल काटने के तुरंत बाद ही जमीन की परस्थत के  नुसा जुताई करें। यद खेत कड़ा हो  ौर जुताई सम्भव न हो तब संचाई देकर जुताई करें। दो या तीन बार बखर या हल चलाकर जमीन भुरभुरी करें,  ंत में पाटा चलाकर भूम समतल बनायें।

 

बुवाई का समय

बुवाई का समय  संचाई की व्यवस्था के  ाधार पर नम्नानुसार बोनी करे

     संचत गेंहू१५  क्टूबर से ३१  क्टूबर तक, २.  र्धसंचत गेंहू १५  क्टूबर से १० नवंबर तक, ३. संचत गेंहू (समय से) १० नवंबर से २५ नवम्बर तक, ४. संचत गेंहू (देरी से) ०५ दसम्बर से २० दसम्बर तक।

 

बीज की मात्रा

संचत एवं असंचत कस्मों के लये ४० कलो,  संचत देर से बोई जाने वाली कस्मों के लये ४८ कलो प्रत एकड़ बीज दर रखी जाती है।बीज की मात्रा का नर्धारण दानों के वजन एवं  ंकुरण क्षमता पर नर्भर करता है। सामान्यतः ३८ ग्राम प्रत एक हजार बीज के वजन वाली कस्मों का बीज ४० कलोग्राम प्रत एकड़ की दर से बोयें। देरी से बोनी की स्थत में बीज दर में २०२५ प्रतात बढ़ोतरी करके बोनी करें।  ंकुरण कम होने की दाा में बीज दर  ावष्यकता  नुसार नर्धारण कर बोनी करें।

 

बीजोपचार

दीमक के नयंत्रण हेतु बीज को कीटनााक दवा क्लोरोपाइरीफास २० ई.सी. ४०० म.ली. ५ लीटर पानी में घोल बनाकर प्रत क्वंटल बीज के हसाब से बीजोपचार करें। इसके पष्चात्‌ कार्बोक्सन (वटावेक्स ७५ डब्ल्यू.पी.) या बेनोमल (बेनलेट ५० डब्ल्यू.पी.) १.५२.५ या थाइरम २.५  ३ ग्राम दवा ग्राम प्रत कलोग्राम बीज के हसाब से उपचारत करें। बुवाई पूर्व बीज को एजेटोबेक्टर ५१०ग्राम एवं पी.एस.बी. कल्चर १०२० ग्राम प्रत कलो ग्राम के हसाब से उपचारत करें।

 

बुवाई का तरीका

 संचत  वस्था में कतार से कतार की दूरी ३० से.मी.  र्धसंचत  वस्था में कतार की दूरी २३२५ से.मी. तथा संचत  वस्था में कतार से कतार की दूरी २० २३ से.मी. रखें। पछेती बोनी की  वस्था में कतार से कतार की दूरी १५१८ से.मी. रखना चाहये। बीज की बुवाई ३ ४ से.मी. गहराई पर करें। ाुष्क बुवाई की स्थत में उथली बोनी  ंकुरण के लये लाभप्रद होती है।

 

उन्नत कस्में

क्र कृष पारस्थतकी पसी कस्में कठया कस्में अवध दनों में उपज क्वं प्रत एकड़
1 असंचत/ र्धसंचत जे.डब्ल्यू.एस.  १७,सुजाता एच.डब्ल्यू. २००४, एच.आई. १५००, एम.पी. ३०२०, सी ३०६ एच.डी. ४६७२ अमर, एच. ाई. ८६२७ 135-140 6-8
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