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मूंगफली की कृष कार्यमाला

भूम का चुनाव एवं तैयारी

पानी का अच्छा नकास, हल्की से मध्यम रेतीली कछारी या दोमट भूम उपयुक्त है। तीन साल के  ंतराल में एक बार गहरी जुताई करें इसके बाद दो बार देाी हल या कल्टीवेटर चलायें एवं बखर चलाकर पाटा लगाना चाहये।
बीज दरः ४०४८ कलोग्राम प्रत एकड़ की दर से बोनी करें।

 

उन्नत जातयाँ:

कस्म पकने की अवध फलयां क.ग्रा./एकड़ तेल प्रतात अन्य विवरण
फुलो प्रगत (जे.एल.२४) १००-११५ १-७ ५०.८ अंगेती उन्नत जात है तथा पूरे देा में इसे सफलतापूर्र्वक लगाया जा रहा है। इसे ग्रीष्म ऋतु में नहीं लगाना चाहये।
जी.जी ३ ९५-१०५ १२-१३ ५१ यह कस्म खरीफ एवं ग्रीष्म के लये उपयुक्त है। यह कालर राट रोग रोधी कस्म है।
टी.जी. २६ १०५-१२० ६-८ ४८ इसको खरीफ एवं ग्रीष्म काल दोनों में लगाया जा सकता है। ३४ दाने वाली लम्बी फली
ज्योत १०५-११० ६-८ ५३.३ समें रुट राट जड़सड़न का प्रभाव कम पाया गया है। दोनों ही मौसम में उगाया जा सकता है।
जे.जी.एन ३ १००-१०५ ६-८ ५० खरीफ मौसम के लये अनुांसत।

 

बीजोपचारः
३ ग्राम थीरम या २ ग्राम कार्बेन्डाजम दवा प्रत कलोग्राम बीज की दर से बीजोपचार करें। पौधों के सूखने की समस्या वाले क्षेत्र में २ ग्राम थीरम / १ ग्राम कार्बेन्डाजम प्रत कलोग्राम बीज मलाकर उपचारत करें या जैवक उपचार ट्रायकोडर्मा ४ ग्राम चूर्ण प्रत कलोग्राम बीज की दर से उपयोग करें। इसके पचात्‌ १० ग्राम प्रत कलोग्राम बीज के मान से रायजोबयम कल्चर से भी उपचार करें।

बोनी का समय एवं तरीकाः
वर्षा प्रारम्भ होने पर जून के मध्य से लेकर जुलाई के प्रथम सप्ताह तक बोनी करना चाहये। कतार से कतार की दूरी ३० से.मी. तथा पौधे से पौधे की दूरी ८१० से.मी. रखना चाहये। बीज ४६ से.मी. गहराई पर बोयें। बोनी कतारों में सरता, दुफन या तफन से करना चाहये।

 

ााद एवं उर्वरकः
भूम की तैयारी के समय गोबर की खाद २४ टन प्रत एकड़ प्रयोग करें। उर्वरक के रुप में ८ कलोग्राम नत्रजन, १६३२ कलोग्राम स्फुर एवं ८ कलोग्राम पोटाा प्रत एकड़ देना चाहये। यद खेत में गोबर की खाद तथा पी.एस.बी. का प्रयोग कया जाता है तो स्फुर की मात्रा ३२ कलोग्राम प्रत एकड़ की जगह मात्र १६ कलोग्राम ही पर्याप्त है। खाद की पूरी मात्रा आधार खाद के रुप में प्रयोग करें। मँूगफली फसल में गंधक का वोष महत्व है। इसलये १० कलोग्राम प्रत एकड़ के मान से गंधक  वय दया जाना चाहये। यद यूरया की जगह  मोनया सल्फेट तथा फास्फेट के रुप में संगल सुपर फास्फेट का प्रयोग कया जाता है तो गंधकक पर्याप्त मात्रा में मल जाता है।  न्यथा ८० कलोग्राम प्रत एकड़ की दर जप्सम या पाइराइट्‌स का उपयोग  ाखरी बखरनी के साथ करें। साथ ही १० कलोग्राम प्रत एकड़ के मान से तीन साल के  ंतर पर जंक सल्फेट का प्रयोग  वय करें।

फसल चक्रः
फसल चक्रः मूंगफली (खरीफ)  गेहॅूं (रबी), मूंगफली (खरीफ)  मक्का (खरीफ), मूंगफली (खरीफ)चना (रबी), मूंगफली ग्रीष्म कपास (खरीफ), मूंगफली ग्रीष्म  मक्का/ज्वार/कपास

 ंतरवर्तीय फसलें:
 ंतरवर्तीय फसल के रुप में मक्का, ज्वार, सोयाबीन, मूंग, उड़द, तु र, सूर्यमुखी  ाद फसलों को ४ः२, २ः१, ८ः२, ३ः१, ६ः३, ९ः३  नुपात में  ावयकतानुसार लया जा सकता है।

 

संचाई :
संचाई की सुवधा होने पर अवर्षा से उत्पन्न सूखे की  वस्था में पहला पानी ५०५५ दन में तथा दूसरा पानी ७०७५ दन में दया जाना चाहये।

नंदाई गु.ड़ाई :
फसल बोने के १५२०, २५३० तथा ४०४५ दन की  वस्था में डोरा या कोल्पा चलावें, जससे समयसमय पर नींदा नयंत्रण कया जा सके। नींदानााक दवा ो के उपयोग से भी नींदा नयंत्रण कया जा सकता है।

खरपतवारनााी रसायनों की मात्रा एवं प्रयोग वधः

खरपतवारनााी मात्रा सक्रय तत्व म.ली./एकड़ उपयोग वध/ समय
पेडीमथेलन ३००-४००     बुवाई के बाद परंतु फसल तथा खरपतवारों के उगने से पूर्व
फ्लुक्लोरेलीन ३००-४०० बुवाई से पूर्व जमीन में ४५ से.मी. गहराई तक मलना चाहये।
एलाक्लोर ४००-६०० बुवाई के बाद परंतु अंकुरण से पूर्व।

 

पौध संरक्षणः
अ. कीड़े  बोडला कीट (व्हाइट ग्रब)

  • मईजून के महीने मे खेत की दो बार जुताई करना चाहये।
  • अगेती बुवाई १०२० जून के बीच करना चाहये।
  • मट्टी में फोरेट १०जी या कार्बोफ्यूरॉन ३जी १० कलोग्राम प्रत एकड़ डालना चाहये।
  • बीज को फफूूंदनााक उपचार से पहले क्लोरपायरीफास १२.५ म.ली. प्रत कलोग्राम बीज को उपचार कर छाया में सूखाकर बोनी करना चाहये।

 


कामलया कीट :  मथाइल पेरामथान २ प्रतात चूर्ण का १० १२ कलोग्राम प्रत एकड़ प्रारम्भक अवस्था में भुरकाव या पैराथयान ५० ईसी का २८०३०० म.ली. प्रत एकड़ के मान से छड़काव करें।
महों, थ्रप्स एवं सफेद मक्खी : इनके नयंत्रण के लये मोनोक्रोटोफॉस ३६ ई.सी. का २२० म.ली. प्रत एकड़ य़ा डाईमथएट का ३० ई.सी. का २०० म.ली. प्रत एकड़ २०० लीटर पानी में घोल बनाकर प्रयोग करें।
सुरंग कीटः  सुरंग कीटः क्यूनालफास २५ ई.सी. का ४०० म.ली., या मोनोक्रोटोफॉस ३६ एस.एल. २४० म.ली. प्रत एकड़ का छड़काव करें।
चूहा एवं गलहरी :  यह भी मूंगफली को नुकसान करते हैं,  तः इनके नयंत्रण पर ध्यान दें।
ब. रोग :
टक्का/पर्ण धब्बा :  बोने के ४५ सप्ताह से प्रारम्भ कर २३ के  ंतर से दोतीन बार कार्बेन्डाजम ०.०५ प्रतात या डायथेन एम४५ का ०.२ प्रतात का छड़काव करना चाहये।
कालर सड़न/ाुष्क जड़ सड़न :  बीज को ५ ग्राम थायरम  थवा ३ ग्राम डाइथेन एम४५ या १ ग्राम कार्बेन्डाजम प्रत कलो ग्राम बीज दर से उपचार करना चाहये।

फसल कटाई :
जैसे ही फसल पीली पड़ने लगे तथा प्रत पौधा ७०८० प्रतात फली पक जावें उस समय पौधों को उखाड़ लेना चाहये। फलयों को धूप में इतना सुखाना चाहये क नमी ८१० प्रतात रह जाये, तभी बोरों में रखकर भण्डारण नमी रहत जगह पर करें। बोरयां रखने के बाद उन पर मेलाथयान दवा का छड़काव करना चाहये।

उपजः  समयानुकूल पर्याप्त वर्षा होने पर खरीफ में मूंगफली की उपज लगभग ६८ क्वंटल प्रत एकड़ त.क ली जा सकती है।