स्कूल शिक्षा

 

गुणवत्ता शिक्षा हेतु नवीन लक्ष्य

 

किसी भी प्रकार के विकास एवं उन्नति के लिए शिक्षा एक महत्वपूर्ण साधन है। शिक्षा के अभाव में कुछ भी अर्थपूर्ण हांसिल नहीं किया जा सकता। यह लोगों के जीवन स्तर में सुधार तथा उनके जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाने हेतु क्षमताओं का निर्माण कर तथा बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साक्षरता के स्तर में वृद्धि से उच्च उत्पादकता बढ़ती है तथा अवसरों के सृजन से स्वास्थ्य में सुधार, सामाजिक विकास और उचित निष्पपक्षता को प्रोत्साहन मिलता है। यह लोगों को अपने बलबूते पर किसी भी निर्णय लेने तथा विचार करने हेतु सामर्थ्य‍ प्रदान करता है।

साक्षरता स्तर में वृद्धि तथा कुशल कार्यबल का विकास, मध्य प्रदेश को जीवन की गुणवत्ता में सुधार हेतु सहायता कर रहा है। आज के बदलते युग में उच्च शिक्षित एवं कुशल पेशेवरों की आवश्यकता निरंतर बढ़ रही है। राज्य के लिए यह अत्यावश्यक है कि वह सभी स्तर के लोगों के लिए शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराए। साथ ही यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि सभी अपनी बुनियादी शिक्षा गुणवत्ता के साथ पूर्ण करे और सभी के लिए उच्च शिक्षा एवं उन्नत कौशल प्राप्त करने के अवसर यहां उपलब्ध हो।

शिक्षा के क्षेत्र में मध्य्प्रदेश ने बहुत अधिक उन्नति की है। साक्षरता दर वर्ष 2001 में 64.11 प्रतिशत थी, (संपूर्ण भारत - 65 प्रतिशत) जो वर्ष 2011 में बढ़कर 70.63 प्रतिशत (संपूर्ण भारत में 74.04 प्रतिशत) हुई।

 

6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के दाखिलों का लक्ष्य लगभग पूरा कर लिया गया है। वर्ष 2011 में, प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के लिए सकल दाखिला अनुपात 98.88 प्रतिशत तथा उच्च प्राथमिक सस्तर (कक्षा 6 से 8) के लिए सकल दाखिला अनुपात 99.27 प्रतिशत रहा है। ड्रॉपआउट रेट में भी कमी आयी है और अब यह प्राथमिक स्तर पर 8.2 प्रतिशत तथा उच्च प्राथमिक स्तर पर 7.4 प्रतिशत हो गई है। मध्य प्रदेश में महिला साक्षरता में सुधार लाने हेतु अधिक जोर दिया जा रहा है। राज्य का लक्ष्य न केवल साक्षर राज्य के रूप में बल्कि स्कू्ली समाज से परे शिक्षा के प्रति जागरूक समाज के रूप में शिक्षित राज्य होना है। इसलिए मध्यप्रदेश शासन सभी को उचित गुणवत्ता तथा प्रासंगिक शिक्षा के अवसर प्रदान करने और साथ ही रोजगारोन्मुखी तथा कौशल विकास के पाठ्यक्रम (कोर्स) पर अधिकतम बल दे रही है। इस क्षेत्र में, शासन भी निजी उद्यमियों को राज्य में रखने हेतु उत्सुक है, जो कि इन उद्देश्यों को वास्तविकता में लाने हेतु सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

 

शिक्षा का अधिकार अधिनियम 6 से 14 वर्ष के बीच के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार को प्रमाणित करने हेतु 1 अप्रैल, 2010 को प्रभाव में लाया गया। इस अधिनियम के द्वारा शासन तथा स्थानीय अधिकारियों पर निर्धारित मापदण्ड और नियम के अनुसार विद्यालय, शिक्षक तथा अन्य सुविधायें उपलब्ध कराने हेतु दायित्व सौंपा गया।

समाज या राज्य अपना अधिकतम विकास करने में तभी सक्षम होगा, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता में वृद्धि कर पाएगा। अपनी इस क्षमता को हांसिल करने के लिए व्यक्ति को शिक्षित होना होगा। ‘'बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा अधिनियम, 2009'' के द्वारा राज्य शासन और स्थानीय निकायों को यह सुनिश्चित करने हेतु आदेश दिया गया है कि 6-14 वर्ष के आयु का प्रत्येक बच्चा कम से कम प्राथमिक शिक्षा पूरी करे।

 

साक्षरता स्थिति

मध्यप्रदेश राज्य की साक्षरता की रूपरेखा का सारांश निम्नलिखित तालिका में दिया गया है

 

  साक्षरता दर (2001) साक्षरता दर (2011)

पुरूष

   76.8   80.5

महिला

   50.2   60

 

स्कूल शिक्षा

 

Schools in Madhya Pradesh  

Government Primary Schools

   83412

Aided Primary Schools (Private)

   852

Unaided Primary Schools (Private)

   12533

Government Upper Primary Schools

   28479

Aided Upper Primary Schools (Private)

   410

Unaided Upper Primary Schools (Private)

   14773

Total High Schools (Including Private)

   6636

Total Higher Secondary Schools (Including Private)

   5211

 

  Govt. Primary School Govt. Upper Primary School

Teacher in Position

   191368    74552

Enrolment

   6804712    3315843

Pupil-teacher Ratio (Private)

   35.6    44.5

 

राज्य में प्राथमिक शिक्षा के सर्वव्यापीकरण हेतु शासन प्रतिबद्ध है। बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षा तक पहुंच में सुधार और समुदाय की भागीदारी को प्रोत्साहित करने पर ध्यान केंद्रित है।

 

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार, राज्य ने प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्कूलों तक पहुंच के सर्वव्यापीकरण का लक्ष्य लगभग हांसिल कर लिया है।
  • आगामी वर्षों में 5 कि.मी. की दूरी के अंदर उच्च विद्यालय स्थाथपित करने का निर्णय लिया गया है।
  • बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के अनुसार, तीन वर्ष के भीतर सभी उच्च विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने के प्रयास किये जा रहे हैं।
  • सर्व शिक्षा अभियान अब आरटीई अधिनियम को कार्यान्वित करने का एक जरिया है।
बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की प्रमुख विशेषताएं है |
  • 6 से 14 वर्ष के वर्ग के सभी बच्चों के लिए मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा ।
  • प्राथमिक शिक्षा पूर्ण होने तक किसी भी बच्चे को रोका नही जायेगा, न ही निष्काषित किया जायेगा और न ही बोर्ड परीक्षा हेतु अग्रेषित किया जायेगा।
  • यदि 6 वर्ष से अधिक उम्र का बच्चा किसी भी स्कूल में भर्ती नहीं हुआ है या जो भर्ती हैं, उसने अपनी प्राथमिक शिक्षा पूर्ण नहीं की है, तो वे अपनी उम्र के अनुसार उचित कक्षा में भर्ती किये जायेंगे और यदि कोई बच्चाम अपनी उम्र के अनुसार उचित कक्षा में प्रवेश लेता है, तो वह संबंधित शिक्षा पाने का हकदार होगा।
  • प्राथमिक शिक्षा हेतु प्रवेश लेने के लिए बच्चे की उम्र का निर्धारण जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर, जो कि जन्म, मृत्यु और विवाह पंजीकरण अधिनियम, 1856 के प्रावधानों के अनुसार हो या संबंधित अन्य दस्तावेज, जो प्रमाणित कर सकते हों, उनके आधार पर किया जायेगा। उम्र प्रमाण पत्र न होने की स्थिति में बच्चे को प्रवेश से वंचित नहीं किया जायेगा।
  • प्राथमिक शिक्षा पूर्ण करने वाले बच्चे को एक प्रमाण पत्र आबंटित किया जायेगा।
  • शिक्षक की स्थिति का आंकलन शिक्षक-छात्र अनुपात के आधार पर किया जायेगा।
  • न्यूनतम 25 प्रतिशत सुविधाहीन तथा कमजोर वर्ग के बच्चों के प्रवेश, सहायता रहित निजी स्कूलों में कक्षा 1 में किये जायें।
  • अच्छी गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान की जाये।
  • स्कूल शिक्षक को पांच साल के भीतर पेशेवर डिग्री प्राप्त करना बंधनकारक होगा अन्यथा वे नौकरी खो देंगे।
  • स्कूल का बुनियादी ढांचा तीन वर्ष में उन्नत किया जायेगा ।
  • वित्तीय भार राज्य और केन्द्र शासन के बीच बांटा जायेगा।

मध्ये प्रदेश, देश के कुछ ऐसे राज्यों में से एक था, जिन्होने आरटीई अधिनियम प्रारंभ होने के एक वर्ष में ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम अधिसूचित किया। अधिनियम के प्रावधानों के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु राज्य स्तर पर आरटीई सेल का गठन किया गया है। इस प्रणाली में पारदर्शिता लाने एवं निगरानी हेतु सूचना प्रौद्योगिकी टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

पहलें

"बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009'' यह प्रमाणित करता है कि बच्चों के अनुकूल दृष्टिकोण से, निष्पक्षता और समानता के साथ शिक्षा की गुणवत्ता बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए सुगम हो। अधिनियम के अन्य संबंधित वर्ग (24, 29 एवं इत्यादि) यह स्पष्ट करते हैं कि अधिनियम की पूर्णरूपेण सुचारूता सुनिश्चित करने हेतु, शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों में शिक्षा संबंधी दृष्टिकोण पुनर्निर्मित करना आवश्यक है। अधिनियम विस्तृत रूप से आवश्यक जरूरतें प्रदान करता है, जो कि स्कूल प्रणाली को सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम के तहत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त यह एक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (नेशनल करिक्युलम फ्रेमवर्क) 2005, या आरटीई अधिनियम, या नेशनल करिक्युलम फ्रेमवर्क फॉर टीचर्स ट्रेनिंग 2010 है, और निष्पक्षता एवं समानता के साथ शिक्षा को सुनिश्चित करना इसका मुख्य उद्देश्य है। मध्यरप्रदेश में बच्चों के अध्ययन स्तर को बढ़ावा देने के लिए निम्नलिखित गतिविधियां की जा रही है;

 

प्रतिभा विकास कार्यक्रम

राज्य में अभ्यास वृद्धि कार्यक्रम के तहत् दक्षता संवर्धन कार्यक्रम लिया गया था। यह कार्यक्रम आरटीई एवं सतत् एवं अवधारणा मूल्यांकन मापदण्डों के आधार पर उन्न्त एवं विकसित किये गये हैं, जिसे प्रतिभा विकास कार्यक्रम का नाम दिया गया है। यह अब दार्शनिक तथा सह दार्शनिक क्षेत्रों को भी शामिल करता है। प्रतिभा विकास कार्यक्रम यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक बच्चा उसकी क्षमता के अनुसार निर्धारित समय सीमा के भीतर सामर्थ्यता के स्तर को प्राप्त करे। कार्यक्रम के उद्देश्य निम्नलिखित है ;

  • शैक्षणिक वर्ष के अंत तक सभी बच्चे पढ़ने, लिखने तथा उनके विषय का ज्ञान प्राप्त करने में सक्षम हो।
  • सभी बच्चे बुनियादी शिक्षा और गणना कुशलता/सामर्थ्यता तथा विषयवस्तु का ज्ञान हासिल करें|
  • पढ़ने की आदत को विकसित करना तथा बच्चे को एक स्वतंत्र पाठक बनाना।
  • निरंतर कक्षा की आवाजाही तथा विद्यार्थी उपलब्धि पर ध्यान केंद्रित करने हेतु प्रभावी निगरानी प्रणाली की स्थापना करना।
 
प्रतिभा विकास कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताएं

इस कार्यक्रम में शामिल उन्नत क्षेत्रों के कुछ मुख्य अंश निम्नलिखित है;

  • हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में आधारभूत सामर्थ्यता।
  • गणित से संबंधित सामर्थ्यता जैसे : अंकों की पहचान, प्लस वेल्यूस, ऐक्सपेन्डेड नोटेशन, जोड़ना, घटाना, गुणा करना, भाग देना, यूनिटरी विधि तथा फ्रेक्शन।
  • कक्षा 4 में, सामर्थ्यता के आधार पर 75 प्रतिशत तथा पाठ्यपुस्तक अभ्यास के आधार पर 25 प्रतिशत मूल्यांकन किया जायेगा। कक्षा 5 के लिए यह प्रतिशत 50-50 होगा ।
  • कक्षा 4 एवं 5 में, सामाजिक विज्ञान का निर्धारण महीने वार और स्कूल स्तर पर किया जायेगा ।
  • कक्षा 6 और 8 के सभी विषयों का मूल्यांकन पाठ्यपुस्तक में दिये गये विषयवस्तु के आधार पर किया जायेगा ।
  • शिक्षक को किसी संबंधित प्रश्न को समझने एवं उसे तैयार करने हेतु एक प्रश्न बैंक का विकास किया जा रहा है।
  • प्राथमिक कक्षा के बच्चों के उपयोग हेतु वर्कशीट तैयार की गयी है, ताकि विकास के तहत वे उच्च प्राथमिक कक्षा में पहुंचे ।
 
प्राथमिक स्कूलों में गतिविधि आधारित शिक्षण

गतिविधि आधारित शिक्षण (एबीएल) दृष्टिकोण से आशा है कि यह न केवल कक्षा के वातावरण की गुणवत्ता में सुधार करें बल्कि बहस्तरीय कक्षाओं के मुद्दों को भी सम्बोधित करे। गतिविधि आधारित शिक्षण (एबीएल) दृष्टिकोण के तहत् आने वाले मील के पत्थरों का सामना करने हेतु दक्षताओं/सामर्थ्यताओं को छोटी इकाईयों में बांटा गया है। इन मील के पत्थरों को अभ्यास सीढि़यों के रूप में रखा गया है और यह अभ्यास सीढि़यां कक्षा 1, 2, 3 और 4 के लिए प्रत्येक विषय हेतु विकसित की गयी हैं। गतिविधि आधारित शिक्षण को राज्य के 50 जिलों के 4000 प्राथमिक स्कूलों में प्रारंभिक रूप से क्रियान्वित किया गया है। अब प्रत्येक जिले में एक विकासखण्ड को कार्यक्रम के तहत कवर किया गया है। प्रारंभ में कक्षा 1 और 2 के सभी विषय जैसे : हिन्दी, अंग्रेजी और गणित के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण दृष्टिकोण लिया गया और अब इसे कक्षा 4 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। एक परिणाम के रूप में निम्न परिवर्तन सफलतापूर्वक कक्षा संबंधी प्रक्रियाओं में शुरू किए गए थे|

  • बच्चों को उनकी अभ्यास क्षमता के अनुसार सीखने की स्वतंत्रता है।
  • बच्चे विभिन्न गतिविधियों द्वारा सीखे।
  • बच्चें अपने स्तर पर सीखने का प्रयास करें।
  • मल्टीं ग्रेड और बहुस्तारीय शिक्षण व्यपवस्था संभव की गयी है।
  • विभिन्न तरह की गतिविधियों और खेल के माध्यम से अभ्यास कराते हुए आनंददायक शिक्षण देना संभव किया गया है।
  • परीक्षा के डर को दूर करने हेतु मूल्यांकन की एक प्रणाली को अपनाया गया है।
  • बच्चों पर आवश्यकतानुसार ध्यान देने के लिए शिक्षक के पास अवसर है।
  • बच्चों से स्कूल बैग का बोझ बहुत दूर किया गया है।
  • बच्चों के लिए अभ्यास करने हेतु बहुत अवसर है।
  • अभ्यास हेतु साथी वर्ग बढ़ाया गया है।
  • अभ्यास हेतु प्रचुर मात्रा में सामग्री तथा उनका उपयोग करना सुनिश्चित किया गया है।
  • बच्चों के लिए अनुकूल कक्षाएं गतिविधि और वातावरण।
  • शिक्षक पूर्ण रूप से बच्चों के सामने आने वाली कठिनाईयों का सामना करने हेतु जागृत हैं।
 
उच्च प्राथमिक स्कूलों में सक्रिय अभ्यास क्रियाविधि (एएलएम)

विज्ञान और सामाजिक विज्ञान पर एएलएम को एक विस्तृत टक्कर के रूप में माना जाता है। एएलएम को राज्य संदर्भ के आधार पर विकसित किया गया है।

कक्षा 6 से 8 तक शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने हेतु एएलएम का लक्ष्य रखा गया है। यह दृष्टिकोण बच्चों को विचार/विषय और किसी अवधारणा संबंधी इच्छाशक्ति को बढ़ाने के योग्य बनाता है। सामान्यत: राज्यो और अन्य स्थानों के एएलएम में बस इतना अन्तर है कि शिक्षक के लिए कोई भी विचार/विषय नक्शे, किसी पाठ की योजना बनाने के काम आता है और साथ ही यह बच्चों की अवधारणा शक्ति को बढ़ाने हेतु एक अग्रिम आयोजक का भी काम करता है। प्रथम चरण में एएलएम को पूरे राज्य भर में प्रारंभ किया गया था और अब यह हर जिले के तीन विकासखण्ड तक बढ़ा दिया गया है।

 

कुछ प्रमुख कार्यक्रम

 

सर्व शिक्षा अभियान

सर्व शिक्षा अभियान के मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित है;

  • सभी बच्चों का स्कूल के लिए नामांकन।
  • उच्च प्रा‍थमिक स्तर तक के सभी बच्चों का रिटेंशन।
  • प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक स्तर के बच्चों में अभ्यास उपलब्धि संबंधी महत्वपूर्ण बढ़ोत्तरी सुनिश्चित करना।
सर्वव्यापीकरण पहुंच
  • प्रत्येक निवासस्थान के 1 किलोमीटर के भीतर 6 से 11 वर्ष तक के वर्ग के 40 बच्चों की उपस्थिति के साथ प्राथमिक शिक्षा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राज्य शासन नीति।
  • इसी प्रकार उच्च प्राथमिक शिक्षा सुविधा, निवास स्थान के 3 कि.मी. के भीतर, जिसमें कि 12 बच्चे जो 5 वी कक्षा उत्तीर्ण कर चुके हों।
स्कूल से बाहर के माहौल के लिए रणनीति
  • जागृति अभियान इत्यादि के फलस्वरूप हमें लाभ में महत्वपूर्ण वृद्धि और एकल दाखिला अनुपात प्राप्त हुआ।
  • कभी भी दाखिला न किये गये बच्चे तथा स्कूल छोड़ने वाले उन बच्चों को उचित उम्र के अनुसार कक्षा में भर्ती किया गया तथा उनको अन्य बच्चों के समतुल्य लाने हेतु खास प्रशिक्षण उपलब्ध कराये गये।
  • वर्ष 2011-12 में लगभग 1.26 लाख बच्चे स्कूल से दूर पाये गये थे। उनकी उम्र के अनुसार उन्हें सक्षम बनाने के लिए खास प्रशिक्षण आयोजित किये गये थे।
  • आवासीय मुख्य प्रशिक्षण केन्द्र :- यह केन्द्र प्राय: उप विकासखण्ड स्तर पर शुरू किये गये थे, खास तौर से वहां, जहां बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल से अनभिज्ञ थे और साथ ही उन बच्चों के लिए जो कि अपनी खास परेशानियों की वजह से शिक्षा पूरी नहीं कर सकते थे।
  • गैर आवासीय मुख्य प्रशिक्षण केन्द्र :- जहां बच्चे स्थानीय स्तर पर शिक्षा पूरी कर सकते है, वहां पर ये केन्द्र शुरू किये गये थे।
विश्वव्यापी रिटेंशन रणनीति
  • बच्चों को आकर्षित करने हेतु प्रलोभन :- सभी बच्चों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, 2 जोड़ी यूनिफॉर्म, कक्षा 6 के उन बच्चों को साईकिल भेंट जो अपने आवास से दूर थे, सामाजिक तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए छात्रवृत्ति योजना, मध्यान्ह भोजन सुविधा ।
  • एसएमसी के लिए प्रेरणा :- संपूर्ण शिक्षित ग्राम योजना।
  • बच्चों का उच्च स्तर सुधारने के लिए :- 100 प्रतिशत दाखिला तथा प्रतिदिन उपस्थिति।
  • ‘'ए'' केटेगरी प्राप्त करने के लिए :- (‍न्यूनतम शिक्षण स्तर परिभाषित करने के लिए 90 प्रतिशत विद्यार्थी) – रू. 5000/- प्रति कक्षा।
  • ‘'बी'' केटेगरी प्राप्त् करने के लिए :- (‍न्यूनतम शिक्षण स्तर परिभाषित करने के लिए 80 प्रतिशत विद्यार्थी) – रू. 2500/- प्रति कक्षा।
स्कूल चलें हम अभियान

मध्यिप्रदेश शासन ने ‘'स्कू‍ल चलें हम अभियान'' यह सुनिश्चित करने हेतु चलाया कि शिक्षा के महत्व का संदेश प्रत्येक परिवार और व्यक्तियों तक पहुंचे, ताकि सभी माता-पिता उनके बच्चों को स्कूल भेजें। एक जन आंदोलन ‘स्कू‍ल चलें हम' के रूप में शुरू किया गया, जिसमें समाज के सभी वर्गों ने यह सुनिश्चित करने हेतु भाग लिया कि सभी बच्चों को नियमित रूप से स्कूलों में भर्ती किया जा रहा है। स्कूल चलें हम अभियान की प्रमुख गतिविधियां इस प्रकार है :-

  • डोर टू डोर संपर्क अभियान। यह सर्वेक्षण 0 से 14 वर्ष तक के वर्ग के बच्चों को शामिल करता है।
  • नारा लिखना।
  • डाटा संग्रहण और स्कू‍ल जाने/या न जाने वालों की जानकारी रखने हेतु ग्रामीण शिक्षा रजिस्टर / शहरी वार्ड शिक्षा रजिस्टर।
  • स्कूल से अलग बच्चों का स्कूल लौटने जैसी रणनीति पर ध्यान रखते हुए सभी पात्र बच्चों को दाखिला ड्राइव की सुविधा।
  • शिक्षा चौपाल का आयोजन।
  • कभी भी नामांकित न किये गये तथा शिक्षा छोड़ने वाले बच्चों की पहचान।
  • आकर्षित करने के लिए स्कूल की स्वूच्छता – हमारी शाला सुन्दर शाला।
  • मीडिया अभियान।
  • प्रवेशोत्सव ।
  • पाठ्य पुस्तकों को वितरण।
  • यूनिफॉर्म और साईकिल के लिए चेक का वितरण।
मध्यान्ह भोजन योजना
  • नामांकन मे वृद्धि कर, रिटेंशन और उपस्थिति के माध्यम से और साथ ही स्कूल में बच्चों के लिए पोषण को ध्यान में रखते हुए शिक्षा के विश्वव्यापिता को बढ़ावा देने हेतु इस योजना का उद्देश्य रखा गया।
लिंग निष्पक्षता पर प्रमुखता से फोकस

मौलिक स्तर पर लड़कियों की शिक्षा के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीईजीईएल) ।

उद्देश्य
  • लड़कियों के लिए मौलिक शिक्षा पहुंच उपलब्ध कराने हेतु सुविधाओं को विकसित करना और बढ़ावा देना।
  • स्कूली शिक्षा प्रणाली में लड़कियों को रिटेंशन (रखवाली) की सुविधा प्रदान करना।
  • शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं और लड़कियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना।
  • शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना।
  • लड़कियों के सशक्तिकरण हेतु उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और संबंधित प्रासंगिकता पर जोर देना।

एनपीईजीईएल शैक्षणिक रूप से 280 पिछड़े विकासखण्डों में लागू किया गया ।

 

एनपीईजीईएल के अंतर्गत निम्नलिखित मुद्दों को संबोधित किया गया :

  • लैंगिक अंतर में कमी लाना।
  • हॉस्टल के माध्यम से लड़कियों की पहुंच बढ़ाना।
  • जीवन कौशल शिक्षा प्रदान करना।
  • स्कूल वर्दी के अतिरिक्त भी प्रोत्साहन देना।
  • स्कू‍लों को पुरूस्कार - एक स्कूल के प्रत्येुक समूह में पुरूस्का्र दिया गया, जो कि लड़कियों के शिक्षा रूचि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। पुरूस्कार लड़कियों के उपलब्धि स्तर के आधार पर दिये गये।
  • मॉडल क्लस्टर स्कूल - उन समूहों में एक स्कूल लड़कियों के लिए मॉडल क्लस्टर स्कूल के रूप में विकसित करने हेतु चुना गया। यह वह स्कूल है, जहां सबसे अधिक संख्या में अनुसूचित जाति/जनजाति/ पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग की लड़कियां दाखिल हैं। लड़कियों के लिए अनुकूल शिक्षण उपकरण, किताबें, खेल हैं। लड़कियों के लिए अनुकूल शिक्षण उपकरण, किताबें, गेम्स और खेल सामग्रियां इत्यादि इस स्कूल में लायी गयीं।
  • गर्ल्स होस्टल - उच्च प्राथमिक स्त़र पर एक खास रणनीति के रूप में लड़कियों के रिटेंशन (रखवाली) सुनिश्चित करने हेतु गर्ल्स होस्टल खोले गये। परिवार में निहित कारकों या बालिकाओं के सामाजिक सांस्कृतिक परिवेश के अतिरिक्त‍ स्कूलों की दूरी तथा संबंधित सुरक्षा भी मौलिक स्तर पर लड़कियों की कम जीईआर का कारण था। हालांकि, इन मुद्दों को संबोधित करने हेतु गर्ल्स होस्टल खोले गये। आज की स्थिति में एनईपीजीईएल के अंतर्गत 239 होस्टल जिसमें 16415 लड़कियां और सर्वशिक्षा अभियान के अंतर्गत 81 होस्टल जिसमें 5635 लड़कियां है। इन सबमें कुल 320 होस्टल क्रियान्वित है और इस नीति से लगभग 22050 लड़कियां लाभान्वित है।
 
कस्तू़रबा गांधी बालिका विद्यालय

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग की लड़कियों पर विशेष ध्यान ।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एक आवासीय विद्यालय हैं, जो कि शिक्षा से वंचित लड़कियां, विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय और अल्पसंख्यक समूहों को कवर करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लड़कियों के स्कूल से दूर, छोटे और बिखरे हुए निवास स्थान की समस्या का यह एक समाधान है। वर्तमान में, 207 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय राज्य् में चल रहे है। लगभग 26898 लड़कियां इन कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में दाखिल की गयी है।

 

नवीन तकनीकि का प्रयोग

कम्प्यूटर एडेड लर्निंग कार्यक्रम(CAL)

कम्प्यूटर सक्षम शिक्षा राज्य सरकार की एक प्रमुख प्राथमिकता है। राज्य ने वर्ष 2000 में विद्यार्थियों के लिए एक कम्प्यूटर सक्षम शिक्षा कार्यक्रम प्रारंभ किया, जिसे ‘'हेडस्टार्ट'' नाम दिया गया। इस कार्यक्रम ने प्रारंभिक स्तर पर कम्प्यूटर का उपयोग शिक्षण उपकरण के रूप में किया। हेडस्टार्ट पर आधारित प्रारंभिक शिक्षा विद्यार्थी उपलब्धि में सुधार का संकेत दर्शाती है और साथ ही प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाली संख्या में वृद्धि करती है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा कक्षा में शिक्षण अभ्यास क्रियाविधि को सहायता देने हेतु विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए इंटरेक्टिव मल्टी‍ मीडिया रीच लेसन (आईएमएमआरएल) और वीडियो फिल्म विकसित की गयी है। राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा विकसित इंटरेक्टिव मल्टी मीडिया रीच लेसन का उपयोग भारत के कुछ अन्य हिंदी-भाषी राज्यों और कुछ गैर सरकारी संगठनों द्वारा किया जा रहा है।

 

नयी आईसीटी लैब की स्थापना

कुछ चुने गये उच्च प्राथमिक स्कूलों में नये कम्प्यूटर टर लैब रखे जायेंगे। इन प्रयोगशालाओं को पूरी तरह से कम्प्यूटर सक्षम शिक्षा प्रदान करने और साथियों के समूहों में सीखने के लिए सुसज्जित किया जाएगा।

एजूसेट कक्षायें

500 स्कू‍लों में आरओटी उपलब्ध कराने की प्रक्रिया चल रही है। आरजीपीईईई के तहत मौजूदा संचरण का उपयोग कर, एमएचआरडी प्रस्ताव के साथ स्कूलों के लिए 24X7 चैनल प्रारंभ करने हेतु, उपग्रह प्राप्त स्टेशनों को स्थापित करने हेतु स्कूल ही एक विकल्प‍ होगा। सीआईईटी-एनसीईआरटी और आरजीपीईईई से प्रसारित कार्यक्रमों को स्कूलों के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। स्कूलों का चयन बेहतर बुनियादी रूपरेखा, शिक्षकों की उपलब्धता और उपयुक्त सुरक्षा व्य्वस्था के आधार पर किया जायेगा । अर्थात हेडस्टार्ट और नॉन हेडस्टाष्ट दोनों तरह के स्कू्ल होंगे।

कम्प्यूटर एडेड लर्निंग कार्यक्रम में शिक्षकों का प्रशिक्षण

सेवाकालीन प्रशिक्षण घटक का ही एक हिस्सा है। हेडस्टार्ट केंद्र में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए यह प्रशिक्षण आयोजित किया गया है। यह प्रशिक्षण सीएएल क्षेत्र में, ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर, सीएएल के शिक्षण विज्ञान और कम्प्यूटर केंद्र प्रबंधन में आयोजित है। ये प्रशिक्षण कोर्स जिला तथा विकासखण्ड‍ स्तर पर आयोजित किये गये हैं। 6000 से अधिक शिक्षक प्रशिक्षित किये गये हैं।

इंटरनेट

वर्ष 2009-10 के दौरान, इंटरनेट सुविधा 800 स्कूलों में प्रदान की गयी थी, जहां यूएसओएफ के तहत सुविधा उपलब्ध थी । वर्ष 2012-13 के दौरान, उन हेडस्टार्ट स्कूलों में जहां बीएसएनएल (बायर और बायरलैस) ब्राडबैंड सुविधा उपलब्ध है को इंटरनेट सुविधा उपलब्धल कराने का प्रयास किया जायेगा।

यह प्रणाली विभिन्न योजनाओं के प्रभाव को सुधारने हेतु लागू की गयी है |

(www.educationportal.mp.gov.in) के साथ निगरानी तथा आईसीटी सक्रिय पहल।

  • जिला और राज्य स्तर पर नियत अवधि में डाटा संग्रहण, समीक्षा और प्रबंधन ।
  • मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से नियमित आवधिक समीक्षा।
  • समवर्ती और इंटरनल ऑडिट ।
  • उपलब्ध संसाधनों के इष्टतम उपयोग और सुव्यवस्थीकरण हेतु स्कूल शिक्षा की जिला जानकारी (DISE) की गुणवत्ता में सुधार।
  • टेली समाधान।
  • ऑनलाईन निगरानी व्यवस्था - सभी निरीक्षण अधिकारी उनके द्वारा किए गए निरीक्षण की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। निरीक्षक द्वारा रिपोर्ट की गयी कोई परेशानी, जैसे शिक्षक की अनुपस्थिति, कम हाजिरी, पाठ्य पुस्तवक संबंधी कठिनाई पर संबंधित अधिकारी द्वारा तत्कााल कार्यवाही हेतु सुविधा उपलब्ध है।
  • संबंधित अधिकारी द्वारा राज्य स्तर/जिला स्तर/ब्लॉक स्तर और स्कूल स्तेर के किसी भी मामलों/कठिनाईयों का विश्लेषण तथा निगरानी और उस पर तत्काल कार्यवाही की जायेगी।
  • स्कूल से बाहर के बच्चों के लिए ऑनलाईन चाइल्डवाईज ट्रेकिंग प्रणाली।
  • स्कूल से बाहर के बच्चों की रूपरेखा अनुसार पंजीकरण व्यवस्था ।
  • संबंधित अधिकारियों द्वारा उनके दाखिलें और उन्हे मुख्य धारा में लाने के लिए किए गए प्रयासों की सतत ट्रैकिंग।
  • बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में लाने हेतु सामान्य व्याक्ति भी किसी स्कू ल के बाहर के बच्चे की रिपोर्ट दे सकता है।
  • 1.5 लाख से अधिक बच्चे पहले ही रजिस्टर्ड किये जा चुके है और आगे भी सक्रियता के साथ किये जा रहे हैं।
  • ओओएस के लिए कारणों का विश्लेषण।

 

पुरूस्कार

 

विभिन्न स्तरों पर शिक्षा के क्षेत्र में आईसीटी सक्षम जांच उपकरण का उपयोग अधिक सराहनीय है। पोर्टल http://www.educationportal.mp.gov.in/ के लिए निम्नलिखित पुरूस्कार प्राप्त किये गये है|

  • भारत सरकार, डीओपीटी, डीआईटी के द्वारा गोल्ड आइकन नेशनल ई-शासन पुरूस्कार।
  • मध्य प्रदेश राज्य शासन द्वारा वर्ष 2008-09 में जनसाधारण वर्ग के अंतर्गत ई-शासन पहल में उत्कृ्ष्ट ता के लिए सर्वश्रेष्ठ सूचना प्रौद्योगिकी परियोजना।
  • विभागीय वर्ग के तहत भारत में ई-शासन पहल की पहचान हेतु सीएसआई निहिलेंट ई-शासन पुरूस्का-र 2008-09।
  • कक्षा 1, 6, और 9 के चाईल्डवाईज डाटा प्राप्त किया जा रहा है। आने वाले वर्ष में चाईल्डवाईज डाटा प्राप्त कर लिया जायेगा और चाईल्ड् वाईज प्रणाली लागू कर दी जावेगी।
  • नवीन आईटी उपयोगिता द्वारा प्रभावी जन सेवा वितरण के लिए मंथन साउथ एशिया ई-शासन पुरूस्कार 2009।
  • पीसी क्वेस्ट द्वारा सर्वश्रेष्ठ ई-शासन परियोजना पुरूस्कार।

 

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