पर्यटन

 

 

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सांची

 

दुनिया का प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ ‘सांची', ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से बारहवीं शताब्दी के दौरान बने स्तूप, मठों, मंदिरों और स्तंभों के लिए जाना जाता है। सांची एक विश्व विरासत स्थल भी है। सांची के यह बौद्ध स्तूप, मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए थे। स्तूप के द्वार की मेहराब पर भगवान बुद्ध का जीवन चरित्र खुदा हुआ है।

 

सांची के प्रमुख आकर्षण हैं ;

 • पहला महान स्तूप

 • दूसरा स्तूप

 • तीसरा स्तूप

 • अशोक स्तंभ

 

कैसे पहुंचे ;

यह विश्व प्रसिद्ध स्मारक राज्य की राजधानी भोपाल से सड़क मार्ग से सिर्फ 45 किमी दूर है।

 

सांची के आसपास

           • उदयगिरि गुफाएं

           ग्यारहसूर

 

ग्यारहसूर मंदिर कम ज्ञात, लेकिन महत्वपूर्ण स्मारकों में से एक हैं।

 

भोपाल

 

मध्य प्रदेश की राजधानी का सुंदर शहर भोपाल, दो शानदार झीलों के आसपास सुरम्य रचना में बसा हुआ है। यह शहर सचमुच भारत के दिल में बसा हुआ है और आगंतुक पर आते साथ अपना जादू दिखाने लगता है। ऐतिहासिक स्मारक, पुरानी मस्जिदें और महल, झीलें, अच्छी तरह से रखरखाव किए हुए बगीचें और उद्यान, पुराने बाजार की हलचल और नया शहर पर्यटकों कों अपनी ओर आकर्षित करता हैं।

 

भोपाल शहर का नाम, इसके संस्थापक राजा भोज के नाम से दिया गया। वे 10 वीं सदी के परमार वंश के प्रसिद्ध शासक थे और माना जाता है की उन्ही ने भोपाल की बड़ी झील का निर्माण किया था। 15 वीं सदी में मालवा के सुल्तान होशंगशाह ने इस गौरवशाली शहर को नष्ट कर दिया था। मौजूदा शहर को एक अफगान शासक, दोस्त मोहम्मद खान ने बनाया था, जिसने औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगल साम्राज्य पर हुकुमत की और अपने स्वयं के वंश की, भोपाल के नवाबों की स्थापना की, जो आज भी यहां का एक शाही परिवार है।

 

सिकंदर बेगम (1857-1901) और शाह जेहान बेगम (1901-1926) इन दो कुशल महिला शासकों ने भी भोपाल पर शासन किया। शाह जेहान बेगम एक महान रानी और भोपाल की आठवी शासक थी। उन्होने शहर में कई भव्य स्मारकों का निर्माण किया तथा भोपाल की डाक व्यवस्था, रेल और जल व्यवस्था का श्रेय भी उन्हे जाता है। आज का भोपाल एक बहुआयामी स्थान है, जिसका पुराना शहर बाजार स्थानों से भरा हुआ है, जहां की पुरानी मस्जिदें और महल, अपने पूर्व शासकों की भव्य छाप का दर्शन दिलाते है और नया, खूबसूरत नियोजित शहर, जहां के विस्तृत रास्ते, पार्क और उद्यान, सरकारी इमारतें और आवास, कार्यात्मक, व्यावहारिक और सौंदर्य से परिपूर्ण दिखाई देते है। इस शहर में सांची, भीमबेटका और भोजपुर भी देखने के लिए आदर्श स्थान है।

 

भोपाल के प्रमुख पर्यटक स्थलों में निम्नलिखित स्थान शामिल है।

 • ताज उल मस्जिद
 • भारत भवन
 • जामा मस्जिद
 • शौकत महल और सदर मंजिल
 • गौहर महल
 • निचली और ऊपरी झील
 • वन विहार राष्ट्रीय उद्यान
 • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय संग्रहालय
 • मानव संग्रहालय
 • Mमोती मस्जिद या पर्ल मस्जिद
 • लक्ष्मीनारायण मंदिर
 • मछलीघर


कैसे पहुंचे ;
भोपाल नियमित हवाई, रेल और सड़क सेवाओं द्वारा दिल्ली, ग्वालियर, इंदौर और मुंबई के साथ जुड़ा हुआ है।

 

भोजपुर

 

भोपाल के दक्षिण-पूर्व में 28 कि.मी. दूरी पर स्थित भोजपुर, भगवान शिव को समर्पित भोजेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर पूरब के सोमनाथ के नाम से मशहूर है और 11 वीं शताब्दी के परमार राजा भोज ने इसकी स्थापना की थी।

 

आंशिक रूप से पूरा भोजेश्वर मंदिर 66 फुट से अधिक ऊंची दिवारों समेत एक साधारण चौकोन आकार में बना हुआ है। मंदिर में बड़े पैमाने पर खुदी गुंबद अधूरी होने पर भी शानदार दिखाई देती है, जो चार स्तंभों के आधार पर खडी है। नीचला दरवाजा साधारण हैं तथा अंदर बने स्तंभ और ऊपरी अनुभागों में बड़े पैमाने पर खुदाई की हुई हैं।

 

कैसे पहुंचे;

दिल्ली, ग्वालियर, इंदौर और मुंबई से भोपाल के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध है, जो यहां से 22 किमी दूर है। इटारसी और झांसी द्वारा मुंबई से दिल्ली जानेवाली प्रमुख रेलगाडीयां भी भोपाल से गुजरती है।

 

ग्वालियर

 

प्राचीन राजधानी का यह शहर, महान राजवंशों का उद्गम स्थल और वीरता की विरासत रहा है। इस शहर के नाम की कहानी 8 वीं सदी से है, जिसके अनुसार प्राचीन काल में सूरज सेन नामक मुखिया ने इस शहर की स्थापना की और एक घातक रोग से उसे ठीक करनेवाले एक महान संत ग्वालिपा के नाम से इस शहर का नामकरण किया। महलों, मंदिरों और स्मारकों के शहर ग्वालियर पर प्रतिहार, कच्छवाह और तोमर जैसे महान राजपूत वंशों के शासकों ने शासन किया। स्वतंत्र भारत के गठन तक यहां सिंधियां वंश की शाही राजधानी की परंपरा जारी रही। यह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के महान गायक तानसेन की भी भूमि रही है। ग्वालियर को अद्वितीय और कालातीत बनानेवाले गौरवशाली अतीत के भव्य स्मृति चिन्हों को पूरी देखभाल के साथ संरक्षित किया गया है।

 

ग्वालियर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में निम्नलिखित स्थान शामिल है।

किला
मन मंदिर पैलेस
तेली का मंदिर
गुजरी महल संग्रहालय
तानसेन का मकबरा
गौस मोहम्मद का मकबरा
जय विलास पैलेस
जय विलास संग्रहालय
स्मारक, यह शहर तात्या टोपे, झांसी की रानी लक्ष्मी बाई और कुछ सिंधिया राजकुमारों जैसे कई स्वतंत्रता सेनानियों के स्मारकों से भरा है। ये सभी एक गौरवपूर्ण अतीत की याद दिलाते हंं और साथ ही देश के सम्मान को बनाए रखने में ग्वालियर के स्थान को दर्शाते है।

  कला विथिका और नगर संग्रहालय
  सूर्य मंदिर

 

 

कैसे पहुंचे;
ग्वालियर नियमित विमान सेवा से दिल्ली, भोपाल, इंदौर तथा मुंबई के साथ जुड़ा हुआ है और यह रेल मार्ग से भी अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

 

चंदेरी

 

शहर में मुगल काल के दौरान बनाया गया एक बड़ा किला है। यहां मालवा सुल्तानों और बुंदेला राजपूतों के कई स्मारक हैं। पुराने चंदेरी शहर में 9 वीं और 10 वीं सदी में बने कई जैन मंदिर है, जो हजारों जैन तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते है। पहाड़ों, झीलों और जंगलों से घिरा यह सुरम्य शहर, सुन्दर साड़ी और जरी के लिए भी जाना जाता है।

 

कैसे पहुंचे; 

चंदेरी शिवपुरी जिले से 127 किमी दूर है।

 

Content Courtesy : MP Madhyam.