पर्यटन

 

 

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उज्जैन

 

यह शिप्रा नदी के तट पर स्थित है और सबसे पुराने और पवित्र भारतीय शहरों में से एक है। प्राचिन समय का उज्जैन, शिक्षा का एक केंद्र होने के साथ सांदीपनी ऋषि, महान कवि कालिदास, राजा विक्रमादित्य और सम्राट अशोक की यादों से पावन है। यह भव्य कुंभ मेले का आयोजन स्थल है, जो बारह साल में एक बार आयोजित किया जाता है। देश के प्रमुख तीर्थयात्रा स्थानों में से एक उज्जैन के उल्लेख वेद, पुराण, रामायण और महाभारत में मिलते है। देश के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक यहां बसा हुआ है।

 

उज्जैन के प्रमुख पर्यटक स्थलों में निम्नलिखित स्थान शामिल है।

  • सांदीपनी आश्रम
  • महाकालेश्वर मंदिर
  • हरसिद्धी मंदिर
  • बड़े गणेशजी का मंदिर
  • गोपाल मंदिर
  • चिंतामण गणेश मंदिर
  • मंगलनाथ मंदिर
  • जंतरमंतर (खगोलीय वेधशाला)
  • कालीदेह पैलेस

 

कैसे पहुंचे ;

यहां से निकटतम हवाई अड्डा इंदौर (58 किमी) है और दिल्ली, ग्वालियर, भोपाल और मुंबई से इंदौर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं। उज्जैन पश्चिम दिशा में भोपाल-नागदा क्षेत्र में है।

 

जबलपुर

 

जबलपुर को मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। यहां कई ऐतिहासिक, पुरातात्विक और प्राकृतिक स्थान देखे जा सकते है।

यह एक प्रमुख प्रशासनिक और शैक्षिक केंद्र भी है। विशाल छावनी क्षेत्र में बडी संख्या में स्कूल और कॉलेज दिखाई देते है। यह शहर महाभारत युग जितना प्राचीन है। 12 वीं सदी के दौरान जबलपुर प्लेजर रिसॉर्ट और गोंड राजाओं की राजधानी हुआ करता था। उसके बाद यहां कालचुरी राजवंश का शासन था। यहां से प्रसिद्ध कान्हा (173 किमी) और बांधवगढ़ (194 किमी) राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा करना भी सुविधाजनक है।

 

जबलपुर के प्रमुख पर्यटक स्थलों में निम्नलिखित स्थान शामिल है।

  • भेराघाट की संगमरमरी चट्टानें
  • मदन महल किला
  • संग्राम सागर और बजनामठ
  • रानी दुर्गावती संग्रहालय
  • धुवांधार प्रपात
  • चौसठ योगिनी मंदिर
  • रानी दुर्गावती की समाधि
  • देवताल
  • पिसनहरी की मढ़ियाब
  • त्रिपुरी

 

कैसे पहुंचे;

यह दिल्ली, भोपाल, ग्वालियर और रायपुर के साथ सड़कों और हवाई मार्ग से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। यह इलाहाबाद द्वारा मुंबई-हावड़ा मुख्य लाइन पर एक मुख्य रेलवे स्टेशन है।

 

अमरकंटक

 

अमरकंटक, देश की पवित्र नदियों में से एक नर्मदा नदी का प्राकृतिक सौंदर्य से भरा स्रोत है। महान संस्कृत कवि कालिदास के साहित्य में अमरकंटक की सुंदरता को दर्शाया गया है। नर्मदा नदी के स्रोत के अलावा माई की बगीयां, कपिल धारा, दुग्ध धारा और झरने देखने लायक हैं। नर्मदा नदी के उगम पर बनाया गया नर्मदा उद्गम मंदिर, भारत के पवित्रतम स्थानों में से एक है। यहां के वार्षिक 'शिवरात्रि' और 'नाग पंचमी' के मेलें, हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करते है।

 

कैसे पहुंचे;

अमरकंटक भोपाल से 575 किमी और जबलपुर से 245 किमी दूर है। निकटतम रेलवे स्टेशन पेंडरा रोड है, जो यहां से 50 किमी दूर है।

 

दिव्य नर्मदा में 'दीप दान'

'नर्मदा जयंती' का त्योहार इस पवित्र नदी के लिए मध्य प्रदेश के लोगों की श्रद्धा का प्रतीक है। मध्य प्रदेश के लोगों के लिए नर्मदा सिर्फ एक नदी नहीं है, बल्कि सदियों से उनका और उनकी भूमि का पोषण करनेवाली माता है।

30 जनवरी के दिन इस त्योहार को नदी के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और अमरकंटक में नदी जहाँ से निकलती है, वहां और इसके कई अन्य स्नान घाटों पर, होशंगाबाद सहित राज्य में असाधारण उत्साह के साथ मनाया जाता है।

इस उत्सव की सबसे उल्लेखनीय बात ये है की यहां लोग प्रार्थना के रूप में इस पवित्र नदी में रोशन दीपक छोडते है। इसे दीप दान कहा जाता है।

 

Content Courtesy : MP Madhyam.